देशभर में घर-घर शौचालय बनने से खासकर गांवों में महिलाओं की स्थिति भले ही बेहतर हुई हो, लेकिन महिला लोको पायलट के लिए वॉशरूम ब्रेक लेना किसी पीड़ा से कम नहीं है। महिला ट्रेन चालकों को इसके लिए वॉकी-टॉकी पर संदेश भेजना पड़ता है, जो स्टेशन मास्टर से लेकर नियंत्रण कक्ष तक कई लोगों के पास पहुंचता है और फिर किसी उपयुक्त स्टेशन पर ट्रेन रुकने पर उन्हें टॉयलेट जाने की सुविधा मिल पाती है।
महिला ट्रेन चालकों का कहना है कि अनौपचारिक तौर पर अपनाई जा रही यह व्यवस्था लोको-पायलट के लिए एक असहज स्थिति उत्पन्न कर देती है। इस तरह ढिंढोरा पीटकर वॉशरूम जाने में होने वाली हिचकिचाहट के कारण कई बार महिलाएं घंटों इंतजार भी करती रहती हैं।
वॉशरूम ब्रेक के लिए दर्जनों अधिकारियों तक पहुंचता है संदेश
एक महिला लोको पायलट ने रविवार को बताया, अगर हमें वॉशरूम ब्रेक की जरूरत पड़ती है तो सबसे पहले साथी पुरुष लोको पायलट को बताना होगा जो स्टेशन मास्टर को सूचित करेगा। इसके बाद यह संदेश ट्रेन संचालन का प्रबंधन संभालने वाले नियंत्रण कक्ष तक पहुंचता है। उन्होंने बताया, इस तरह ये बात वॉकी-टॉकी के जरिये रेंज के दर्जनों अन्य अधिकारियों तक पहुंचती कि इंजन में एक महिला ड्राइवर है और वह वॉशरूम जाना चाहती है।
महिला ट्रेन चालकों में 90 फीसदी सहायक लोको पायलट
उनके मुताबिक, रेलवे की अधिकतर महिला लोको-पायलट इस असहज स्थिति से जूझ रही हैं। रेलवे में कार्यरत 1,700 से अधिक महिला ट्रेन चालकों में से 90 फीसदी सहायक लोको पायलट हैं जो यात्री या मालगाड़ियों में पुरुष लोको पायलटों के सहायक के तौर पर काम करती हैं।