भारतीय रेलवे ने तीन साल में टिकट कैंसिल कराने और वेटिंग टिकटों को रद्द नहीं कराने से ही 9 हजार करोड़ रुपये कमा लिए। यह जानकारी आरटीआई के तहत सामने आई है।
क्रिस ने आरटीआई के जवाब में कहा कि इंटरनेट और काउंटरों पर जाकर टिकट खरीदने वाले लोगों की संख्या में भी काफी अंतर है। तीन साल की अवधि में 145 करोड़ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन टिकट जबकि 74 करोड़ लोगों ने रेलवे काउंटरों पर जाकर टिकट लिए।
समाजिक कार्यकर्ता स्वामी ने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि भारतीय रेलवे की आरक्षण नीति भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और काउंटर रिजर्वेशन को लेकर नीतियों के अंतर के कारण यात्रियों पर अनावश्यक वित्तीय और मानसिक बोझ है। याचिका में इसे खत्म करने और यात्रियों को राहत देने तथा अनुचित तरीके से कमाई रोक लगाने का आदेश देने का आग्रह किया गया है।