रेल मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे में 30 हजार पदों को खत्म करने का दावा करने वाली रिपोर्ट गलत है। मंत्रालय के अनुसार, यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें समय के साथ गैरजरूरी हो चुके पदों का पुनर्वितरण किया जाता है और उन्हें अहम संचालन और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाता है।
मंत्रालय ने कहा, इसका मकसद मानव संसाधन का बेहतर उपयोग और कार्यक्षमता में सुधार करना है। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि वर्ष 2025-26 में सुरक्षा श्रेणियों में हजारों नए पद बनाए गए हैं। इसलिए, कुल स्वीकृत पदों की संख्या में कोई कमी नहीं हुई है।
रेल मंत्री ने क्या कहा था?
दिल्ली में 22 अप्रैल को ऑल इंडिया ट्रैक मेंटेनर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई थी, जिसमें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा थाकि सरकार का ध्यान अब रेल संचालन और रेल पथ (ट्रैक) कर्मचारियों की सुरक्षा को विकसित देशों के स्तर के बराबर करने पर है।
'रेलवे सुरक्षा और पटरियों के रखरखाव के तरीकों में होगा बदलाव'
उन्होंने रेल पथ कर्मचारियों और रेलवे अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले पांच से आठ वर्षों में भारत में रेलवे सुरक्षा और पटरियों के रखरखाव के तरीकों में पूरी तरह बदलाव किया जाएगा और एक सदी से चली आ रही पुरानी तकनीकों की जगह नई तकनीक अपनाई जाएगी।
'प्रधानमंत्री नरेंद्र और रेलवे कर्मचारियोंको प्रगति का श्रेय'
उन्होंने कहा, हम वहीं रुकना नहीं चाहते। हम और बेहतर काम करना चाहते हैं। हम भारतीय रेलवे को विकसित देशों के स्तर तक ले जाना चाहते हैं। उन्होंने अब तक हुई प्रगति का श्रेय पूरे रेलवे कर्मचारियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया।
'ट्रेन की पटरियों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा प्राथमिकता'
उन्होंने यह भी बताया कि भारत के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब संसद ने हाल ही के पूरे बजट सत्र में रेलवे कर्मचारियों के समर्थन में काम किया। वैष्णव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में रेल हादसों में 90 प्रतिशत की कमी आई है। लेकिन सुरक्षा के मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती उन कर्मचारियों की सुरक्षा है, जो चलती ट्रेन की पटरियों पर काम करते हैं। पहले इस्तेमाल होने वाली वीएचएफ आधारित 'रक्षक' प्रणाली कई बार पहाड़ी, मोड़ वाले या दूर-दराज इलाकों में सिग्नल न पहुंचने की वजह से काम नहीं कर पाती थी।
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'देश के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में अब 4जी-5जी कनेक्टिविटी उपलब्ध'
इस समस्या को दूर करने के लिए रेलवे ने मोबाइल फोन आधारित एक सुरक्षा ऐप बनाया है, जिसका अभी दक्षिण और पश्चिम रेलवे में परीक्षण चल रहा है। उन्होंने कहा कि 4जी और 5जी मोबाइल कनेक्टिविटी अब देश के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में उपलब्ध है और जहां कमी होगी, वहां टावर लगाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि सफल परीक्षण के बाद यह ऐप सभी पटरियों के कर्मचारियों को दिया जाएगा ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारी सुरक्षित हैं तो रेलवे भी सुरक्षित है और उनकी सुरक्षा सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।