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Indian Railways: दलाल रेलवे टिकट बुकिंग के लिए अपनाते थे यह तरीका, इस सॉफ्टवेयर से बगैर OTP के हो जाता था खेल

Fri, 21 Apr 2023 05:41 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Railways: सीबीआई ने यह एक्शन उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली में ट्रैवल एजेंट्स के 12 ठिकानों पर लिया। ये सभी एजेंट्स कथित रूप से टिकट खरीदने के लिए मैन्युअल सिस्टम को दरकिनार करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे, जो प्रीमियम पर यात्रियों को बेचे गए थे...
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Indian Railways: CBI - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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भारतीय रेलवे के आरक्षित बर्थ के ई-टिकटों की अवैध बिक्री के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई ने भारतीय रेलवे से जुड़ी संस्था आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिए रेलवे की आरक्षित सीट के ई-टिकटों की अवैध बिक्री से संबंधित के मामलें में छापेमार कार्रवाई की है। सीबीआई ने यह एक्शन उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली में ट्रैवल एजेंट्स के 12 ठिकानों पर लिया। ये सभी एजेंट्स कथित रूप से टिकट खरीदने के लिए मैन्युअल सिस्टम को दरकिनार करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे, जो प्रीमियम पर यात्रियों को बेचे गए थे।

सीबीआई ने अपनी छापेमारी में डिजिटल उपकरण, अवैध सॉफ्टवेयर वाले मोबाइल फोन, आपत्तिजनक दस्तावेज और अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर पहले बुक किए गए यात्रियों के टिकट सहित अन्य विवरण बरामद किए। सीबीआई ने 02 मार्च 2021 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जो एक सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप का उपयोग कर कन्फर्म तत्काल सीटें देने का दावा कर रहे थे। ये सभी एजेंट कथित रूप से टिकट खरीदने के लिए मैन्युअल प्रविष्टि प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे, जो यात्रियों को महंगे दाम पर बेचे गए थे।

रेलवे को इस तरह देते हैं धोखा

आमतौर पर जब किसी को रेलवे टिकट बुक करना होता है, तो वह आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर टिकट बुक करना होता है। इस दौरान व्यक्ति को यूजर आईडी और पासवर्ड डालने के बाद लॉगिन कैप्चा डालना होता है। इसके बाद यात्रियों की डिटेल भरनी होती है। इसमें एक यूजर अपनी आईडी से एक से लेकर छह यात्रियों की टिकट बुक कर सकता है। वेबसाइट और एप पर जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबमिट करने के लिए भी एक कैप्चा भरना होता है। पेमेंट करने के लिए संबंधित रजिस्टर्ड मोबाइल में एक ओटीपी आता है, जिसे डालने के बाद पेमेंट करना होता है और तब जाकर टिकट मिल पाता है। इसमें औसतन दो मिनट का समय लग जाता है।

जबकि दूसरी तरफ ऐसे दलाल रेलवे टिकट बुकिंग के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इस सॉफ्टवेयर की मदद से दोनों कैप्चा भरने की जरूरत नहीं पड़ती है। सॉफ्टवेयर इसे बायपास करा देता है। वहीं, पेमेंट के लिए भी ओटीपी की जरूरत नहीं होती है। सीधा पेमेंट हो जाता है। इस तरह कुछ सेकेंड में दलाल कन्फर्म टिकट बुक करा लेते हैं। एक आईडी से छह यात्रियों के टिकट बुक हो सकता है। यानी बुकिंग की कतार में वर्चुअल छह लोग लग सकते हैं।

जबकि दलाल एक आईडी से 144 लोगों की टिकट बुक करा सकता है। इस वजह से आम लोगों को टिकट नहीं मिल पाता है। पहला तो कुछ सेकंडों में टिकट बुक होता है, और दूसरा 144 लोगों का टिकट एक साथ बुक कराता है। इतना ही नहीं सॉफ्टवेयर की मदद से 144 यात्रियों की डिटेल पहले से तैयार रहती थी, जिसे निर्धारित समय होते ही एड कर दिया जाता है। इस तरह डिटेल भरने में लगने वाला समय भी बच जाता है।

हर दिन रेलवे से 2.40 करोड़ लोग करते है यात्रा

वाणिज्य मंत्रालय के ट्रस्ट इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के एक सर्वे के अनुसार भारत में रोजाना 22,593 ट्रेनों का संचालन होता है। हर दिन भारतीय रेलवे से 2.40 करोड़ यात्रा करते हैं। आईआरसीटीसी एक माध्यम है जिसकी मदद से यात्री ट्रेन से यात्रा के लिए टिकट की ऑनलाइन बुकिंग करते हैं। यात्री ट्रेन टिकट की बुकिंग के वक्त कंफर्म टिकट पाने के लिए दूसरी ट्रेन का ऑप्शन भी चुन सकते हैं। दो ऑप्शन चुनने से कंफर्म टिकट आसानी से मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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