फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तानी जेलों में कैसे नरक भोगते हैं भारतीय, आंखों देखी

Tue, 11 Apr 2017 06:07 PM IST
amarujala.com, Presented By: विजय जैन
विज्ञापन
पाकिस्तान जेल (डेमो पिक)
विज्ञापन
पूर्व भारतीय नेवी अफसर कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा का ऐलान होने से पाकिस्तान की जेलें फिर चर्चा में आ आई हैं। 
विज्ञापन


ये ऐसी जेलें हैं, जहां हिंदुस्तानी कैदियों के साथ बड़ा बुरा बर्ताव हो रहा है। जेल में हर कोई भारतीयों से नफरत करता है। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल तो पहले से चर्चा में है। जेल की क्षमता चार हजार कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में इसमें 17 हजार लोग कैद हैं। पहले चमेल सिंह और फिर सरबजीत सिंह, दोनों भारतीय कैदियों की हमला कर हत्या कर दी गई। दोनों की मौत के बाद कोट लखपत जेल में बंद 36 अन्य भारतीय कैदी बेहद डरे हुए हैं।  

पाकिस्तान की मलीर लांघी जेल में सवा साल से बंद तीन मछुआरे जब रिहा होने पर वापस कानपुर स्थिर घर लौटे तो जेल के अनुभव बताते हुए तीनों रो पड़े। जयचंद्र ने बताया कि खाने में दिनभर में सिर्फ पांच रोटियां मिलती थीं। इनमें एक रोटी सुबह और दो-दो दोपहर और रात को दी जाती थीं। साथ में तीन दिन दाल और तीन दिन मीट जबकि, रविवार की रात चावल भी मिलता था। ज्यादा खाना मांगने पर पाकिस्तानी सैनिक पीटने लगते थे और गंदी गालियां भी बकते थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

डेमो पिक
युवकों ने बताया कि आखिरकार जेल-जेल ही होती है। वह भी शत्रु देश में अपनों और अपने मुल्क से दूर। बताया कि मलीर लांघी जेल में कुल 439 मछुआरे बंद थे इनमें कोई न कोई अपनों और वतन की याद में रोता ही मिलता था। ऐसी स्थिति में हमलोग आपस में एक-दूसरे को दिलासा देकर उसका दुख-दर्द बंटाने की कोशिश जरूर करते थे। जबकि, जेल के कुछ गार्डों और अधिकारियों के बारे में बताया कि वह लोग भारतीयों से नफरत करते हैं। खाने में शिकायत करने पर अन्य कैदियों के सामने उनको जमकर पीटते थे। जबकि, किसी कैदी के घर से पत्र का उत्तर आने पर लिफाफे में निकलने वाले रुपये और फोटो आदि जब्त करके अपने पास रख लेते थे। 

मोहम्मदपुर गांव निवासी रविशंकर गौड़, जयचंद्र गौड़ और संजय कुरील बीते वर्ष 15 अक्तूबर 2015 को गुजरात के ओखा समुद्री तट पर मछली का शिकार करते समय अन्य 27 भारतीय मछुआरों के साथ पाक जल सेना के हत्थे चढ़ गए थे। गौरतलब है कि मछुआरों को विदेश में पकड़े जाने पर चार माह की कैद होती है, लेकिन पाकिस्तान सरकार उन्हें नौ महीने से चार वर्ष तक जेल बंद रखती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें