संयुक्त राष्ट्र करेगा सम्मानित
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भारत के शहरों में 2050 तक 30 करोड़ अतिरिक्त आबादी जुड़ने का अनुमान है। यूएन हैबिटैट ने दुनिया के शहरों पर अपनी पहली रिपोर्ट ‘वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट - 2016 (अर्बनाइजेशन एंड डेवलपमेंट) एमर्जिंग फ्यूचर’ में कहा है कि बढ़ती आबादी की जरूरतों के लिए देश में जलवायु अनुकूल शहरों के विकास की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद में शहरी क्षेत्रों का योगदान 60 फीसदी से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक शहरी आबादी में 30 करोड़ लोगों के और जुड़ने का अनुमान है।
इसके चलते भारत सरकार को आने वाले समय में 100 नए शहर बनाने की घोषणा करनी पड़ी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 2000 से 2005 तक शहरी रोजगार में ग्रामीण रोजगार की तुलना में 3.22 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस दौरान ग्रामीण रोजगार में वृद्धि दर 1.97 फीसदी रही। संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमन सेटलमेंट प्रोग्राम रिपोर्ट में कहा गया है कि अतिरिक्त ग्रीन हाउस गैस का जलवायु परिवर्तन पर असर होगा। इसका विकल्प है घने, कम बुनियादी ढांचा और कम-ऊर्जा वाले शहरों का निर्माण करना। रिपोर्ट में कहा गया कि इसके लिए नगर निगमों के पास धन और परिवहन, बिजली, संचार, जलापूर्ति और स्वच्छता जैसे बुनियादी ढांचे के लिए धन की व्यवस्था दोहरी चुनौती है।
बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान जैसे बड़े दक्षिण-एशियाई देश अपने बड़े शहरों, मसलन ढाका, मुंबई, दिल्ली, कराची और लाहौर में अपनी शहरी आबादी का विस्तार कर रहे हैं और दूसरे दर्जे के शहरों की संख्या भी बढ़ा रहे हैं।