फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय अध्ययन का दावा- बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती है भारत की जनसंख्या वृद्धि दर

Thu, 02 Aug 2018 04:12 AM IST
एजेंसी, लंदन
विज्ञापन
india
विज्ञापन

पूरे देश की बजाय अलग-अलग राज्यों के आंकड़ों को जोड़ने वाले मौजूदा मॉडलों के द्वारा भारत की जनसंख्या वृद्धि दर को बहुत बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है। दरअसल इसका कारण है कि उच्च प्रजनन दर वाले राज्य उच्च राष्ट्रीय आबादी के अनुमानों में शामिल होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों के बीच विविधता और शिक्षा के स्तरों में अंतर से अधिक सटीक आंकड़े मिलने में मदद मिल सकती है। 

विज्ञापन

शोधकर्ताओं ने कहा कि सटीक जनसंख्या अनुमान भारत और उसके कार्यबल को प्रति व्यक्ति उच्च जीडीपी वाले अधिक विकसित एशियाई देशों की बराबरी करने में मदद कर सकते हैं। ऑस्ट्रिया के इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर अप्लाइड सिस्टम एनालिसिस के विश्व जनसंख्या कार्यक्रम निदेशक वोल्फगैंग लुत्ज ने कहा कि भारत एक बेहद विविधतापूर्ण उप महाद्वीप है।

एक देश होने के कारण इसे यूरोप के समान इकाई नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले दशकों में भारत का पूर्वानुमान काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि विविधता के किन स्रोतों को मॉडल में शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन


भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बीच विविधता के लिए शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन तैयार किया है। इसमेें भारत की जनसंख्या विविधताओं के पांच आयामी मॉडलों को शामिल किया गया। इसमें निवास, राज्य, आयु, लिंग और शिक्षा के स्तर के ग्रामीण या शहरी स्थान शामिल हैं। इस मॉडल का इस्तेमाल जनसंख्या अनुमान परिवर्तन को दिखाने के लिए किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें