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संसद हमले में एके-47 से नहीं आम राइफल्स से किया था आतंकियों को ढेर, जानें कितनी सुरक्षित हुई दिल्ली

Fri, 13 Dec 2019 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद पर हमला, बचाव करते जवान (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
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संसद हमले के दौरान सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के पास अत्याधुनिक स्वचालित हथियार नहीं थे। खासतौर से सीआरपीएफ की बात करें, तो अधिकांश जवानों के पास एसएलआर, इंसास और कार्बाइन थी। उस वक्त सिपाही को एसएलआर, तो हवलदार या उससे ऊपर के रैंक वाले कर्मी को कारबाइन जारी की जाती थी। दिल्ली पुलिस भी एसएलआर से अपना काम चला रही थी।

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2001 में एके-47 जैसे स्वचालित हथियारों का चलन ज्यादा नहीं था। आतंकियों के पास एके-47 जैसे स्वचालित हथियार थे। आज उसी दिल्ली और संसद भवन की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों को एके-47, एक्स 95, बरेटा कारबाइन और ग्लॉक पिस्टल मुहैया कराए गए हैं। इनसे भी ऊपर चलें तो एनएसजी कमांडों के पास कई दूसरे घातक हथियार मौजूद हैं।
 

संसद हमले से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने अब खुद को इतना मजबूत कर लिया है कि हमला जमीन या आसमान से हुआ, तो दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। अत्याधुनिक हथियारों से लैस स्वैट कमांडो दस्ते 24 घंटे तैयार रहते हैं। आसमान के रास्ते हमले की सूचना बिना किसी देरी के पुलिस तक पहुंच जाए, इसके लिए उन्हें रेडार इनेबल सर्विलांस वैन मुहैया कराई गई हैं। स्वैट दस्ते को आतंकी हमले से निपटने का बाकायदा कठोर और तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है।

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रेडार इनेबल सर्विलांस वैन के जरिए पुलिस को किसी भी आपातकालीन स्थिति के बारे में पहले ही जानकारी मिल जाएगी। कमांडो दस्ते को बख्तरबंद गाड़ियां दी गई हैं। इस वाहन पर हमले का असर नहीं होता और इसमें बैठे जवान पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं। अगर दिल्ली पुलिस का आतंकियों से सीधा मुकाबला हो जाए, तो जवान सुरक्षित रहें, इसलिए उन्हें अत्याधुनिक बुलेटप्रुफ जैकेट मुहैया कराई गई है। इसके अलावा राजधानी के संवेदनशील स्थानों पर बूम बैरियर, टायर किलर्स, रोड ब्लॉकर्स और बोलार्ड्स जैसे उपकरण लगाए गए हैं। ये सभी उपकरण कम्प्यूटर एक्सेस कंट्रोल से जोड़े गए हैं।

इनसे हुई राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा मजबूत

  • हर जिले में स्वैट दस्ते तैनात किए गए हैं 
  • रात में पिकेट लगाकर गहन चैकिंग 
  • बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर ड्रोन एवं कैमरों से नजर
  • 400 से ज्यादा इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल 
  • मार्केट और मुख्य सड़कों पर सीसीटीवी लगाने की प्रक्रिया शुरू 
  • इंटीग्रेटिड कमांड कंट्रोल को-ऑर्डिनेशन एंड कम्युनिकेशन सेंटर
  • क्विक एक्शन टीम का गठन
  • मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग

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