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सीआरपीएफ की इस बटालियन ने किया था संसद हमले को नाकाम, आज कश्मीर में है तैनात

Fri, 13 Dec 2019 04:32 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Parliament Attack 2001 CRPF Personnels - फोटो : Social Media
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संसद भवन पर हमले के दौरान सीआरपीएफ की 23वीं बटालियन के जांबाजों ने असीम बहादुरी दिखाई थी। आतंकियों की गोली से लहू-लुहान हुए सीआरपीएफ के हवलदार वाईबी थापा और सिपाही सुखविंदर सिंह ने मानव बम को संसद में प्रवेश नहीं करने दिया। आतंकियों में शामिल मानव बम, जो कि संसद के गेट नंबर एक से अंदर पहुंचने के प्रयास में था, को पहले ही ढेर कर दिया। अगर मानव बम बने आतंकी को तीस सेकेंड का समय मिल जाता, तो उसका संसद भवन के भीतर पहुंचना तय था।

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सीआरपीएफ की वही 23वीं बटालियन आज कश्मीर में आतंकियों का खात्मा कर रही है। यह बटालियन करीब आठ साल से श्रीनगर में तैनात है। इस बटालियन के दर्जनों जांबाज आतंकियों से लोहा ले चुके हैं। संसद भवन पर हमले के दौरान सीआरपीएफ की 23 बटालियन के जांबाजों ने असीम बहादुरी दिखाई थी। सीआरपीएफ के हवलदार वाईबी थापा और सिपाही सुखविंदर सिंह गेट नंबर 11 पर तैनात थे। जैसे ही उन्होंने गोली चलने की आवाज सुनी, तो वे हरकत में आ गए। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, उन्होंने सामने से आतंकियों को भागते हुए देखा। उनमें एक आतंकी अपने चारों तरफ विस्फोटक बांधे हुए था।

हालांकि सुखविंदर ने उस पर तीन गोलियां दागीं, लेकिन वह बच गया। संसद का गेट नंबर एक, जहां से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष का आना-जाना होता है, से आतंकियों ने अंदर घुसने की योजना बनाई थी। वाईबी थापा भी तुरंत गेट नंबर एक पर पहुंचा और फायरिंग शुरू कर दी। उन दोनों ने सिपाही डी. संतोष कुमार के साथ मिलकर चार आतंकियों को मार गिराया। उसी वक्त मानव बम बना आतंकी संसद भवन के अंदर प्रवेश करने से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर था, उसे सुखविंदर ने मार दिया।
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हमले के दौरान 23वीं बटालियन की कमान कमांडेंट आरएस मेहरा ने संभाली थी। सरकार ने वाईबी थापा, सुखविंदर सिंह और डी. संतोष कुमार को शौर्या चक्र एवं सिपाही विजय बहादुर, कुलवंत सिंह को 50-50 हजार रुपये नकद इनाम और पदोन्नति व निरीक्षक जीडी मोहन और हवलदार जी एप्पा राव को 50-50 हजार रुपये के इनाम से नवाजा गया।

वे बहादुर आज भी कर रहे आतंकियों का खात्मा

संसद पर हमले के दौरान भी सीआरपीएफ की 23वीं बटालियन तैनात थी, आज यही बटालियन कश्मीर के तनाव ग्रस्त क्षेत्र में आतंकियों से लोहा ले रही है। इस बटालियन की तैनाती से 25-30 किलोमीटर दूर ही संसद भवन हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू, जिसे 2013 में फांसी दे दी गई, का पैतृक गांव पड़ता है। बटालियन के जांबाज दर्जनों बार आतंकियों से लोहा ले चुके हैं। खास बात है कि इस बटालियन को सीआरपीएफ में विशेष सम्मान की नजर से देखा जाता है। आज भी जब किसी नए जवान को यह मालूम होता है कि उसकी पोस्टिंग 23वीं बटालियन में हो रही है, तो वह खुद को गौरान्वित महसूस करता है।

 

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