भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक वनिता गुप्ता ने इतिहास रच दिया है। अमेरिकी संसद ने एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के पद पर उनके नाम की पुष्टि कर दी है। सीनेट में 49 के मुकाबले 51 मत पाकर ओबामा प्रशासन के दौरान न्याय विभाग में अपनी सेवाएं दे चुकी वनिता गुप्ता अब अमेरिका के न्याय मंत्रालय में तीसरी रैंकिंग का सर्वोच्च पद पाने वाली पहली अश्वेत महिला बन गई हैं।
मतदान से पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उन्होंने ‘बहुत ही दक्ष और सम्मानित’ भारतीय मूल की वकील वनिता गुप्ता को नामित किया है, जिन्होंने अपना पूरा करियर नस्ली समानता व न्याय की लड़ाई में खपाया है।
वनिता का विरोध करने वाली रिपब्लिकन पार्टी की ही महिला नेता लिसा मुर्कोव्स्की ने बाइडन के उम्मीदवार के पक्ष में अपना मत देकर उनके नाम पर मुहर लगा दी। उनके नाम को 51-49 के अंतर से मंजूरी मिल गई।
रिपब्लिकन नेताओं पर गुप्ता द्वारा पूर्व में सोशल मीडिया पर की गई आलोचना के कारण पार्टी ने उनके नाम का विरोध किया लेकिन रिपब्लिकन नेता मुर्कोव्स्की ने उन्हें वोट देते हुए कहा, मुझे लगता है कि वनिता गुप्ता निजी तौर पर अन्याय का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध रही हैं। बता दें कि यदि वे गुप्ता के पक्ष में मत नहीं देते तो 100 सदस्यीय सीनेट में उनकी पुष्टि का मामला टाई होकर रह जाता।
सबसे पहले बाइडन ने दी बधाई
वनिता गुप्ता के नाम पर सीनेट की मुहर लगने के बाद सबसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के बतौर सेवा देने के लिए पहली अश्वेत महिला को इतिहास रचने पर बधाई। अब, मैं सीनेट से क्रिस्टन क्लार्क के नाम की भी पुष्टि करने की अपील करता हूं। दोनों बेहद योग्य हैं, अति सम्मानित वकील हैं जो नस्ली समानता एवं न्याय को बेहतर बनाने के प्रति समर्पित हैं।
चक शूमर ने निभाई अहम भूमिका
भारतवंशी वनिता गुप्ता पहली नागरिक अधिकार वकील भी हैं जो न्याय मंत्रालय के शीर्ष तीन पदों में से एक पर सेवा देंगी। सीनेट के प्रमुख नेता चक शूमर ने उनके नाम की पुष्टि में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, वे हमारी संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसी में लंबे समय से अपेक्षित नजरिया लाएंगी।