सूरत के 75 वर्षीय हीरा कारोबारी धीरू रमानी को माली में तीन महीने बंधक रखने के बाद किडनैपर्स ने रिहा कर दिया है। अमेरिका में रहने वाले उनके परिवार ने 44 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती देकर उनकी जान बचाई। फिलहाल वे माली में सुरक्षित हैं और स्थानीय पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पश्चिम अफ्रीका के देश माली से एक बड़ी खबर सामने आई है। लगभग तीन महीने तक बंधक बनाए रखने के बाद किडनैपर्स ने भारतीय मूल के 75 वर्षीय हीरा कारोबारी धीरू रमानी को रिहा कर दिया है। अप्रैल के महीने में किडनैपर्स ने उनका अपहरण किया था। उन्हें छुड़ाने के लिए परिजनों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। हालांकि, वह अब सुरक्षित हैं और स्थानीय प्रशासन उनसे पूछताछ कर रहा है।
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किडनैपर्स के चंगुल से कैसे छूटे धीरू रमानी?
सूरत के हीरा उद्योग से जुड़े सूत्रों ने इस घटना का खुलासा किया है। किडनैपर्स ने शुरुआत में धीरू रमानी को छोड़ने के बदले 100 करोड़ रुपये (लगभग 10 मिलियन यूरो) की मांग रखी थी। इसके बाद अमेरिका में रह रहे उनके परिवार ने किडनैपर्स के साथ बातचीत शुरू की।
कड़ी बातचीत और मोलभाव के बाद यह रकम चार मिलियन यूरो (लगभग 44 करोड़ रुपये) पर तय हुई। परिवार ने फिरौती की रकम चुकाकर उनकी रिहाई पक्की की। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी भारतीय सरकारी एजेंसी की सीधी भूमिका नहीं रही।
कौन हैं धीरू रमानी और माली में क्या कर रहे थे?
धीरू रमानी मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के धार गांव के निवासी हैं। वर्ष 1980 से वे सूरत के प्रसिद्ध हीरा व्यापार से जुड़े हुए हैं। बाद में वे परिवार के साथ अमेरिका में बस गए। वे कुछ समय पहले माली में एक सोने की खदान खरीदकर वहीं रह रहे थे। रिहाई के बाद भी वे माली में ही मौजूद हैं। स्थानीय पुलिस उनसे किडनैपिंग और रिहाई के पूरे घटनाक्रम की जानकारी ले रही है।