थाईलैंड और चीन की तर्ज पर देश के विभिन्न हिस्सों में 'अंतरराष्ट्रीय नर्सरी हब' स्थापित करने की आवश्यता है। अगर ये हब स्थापित हो जाते हैं, तो भारत का नर्सरी कारोबार, दुनिया के कई देशों में डंका बजा सकता है। चीन और थाईलैंड में नर्सरी का कारोबार करने वालों को एक हब मुहैया कराया है। दूसरे मुल्कों से आने वाले कारोबारी सीधे वहीं पहुंचते हैं। नई दिल्ली में बुधवार को 'बागवानी नर्सरी के आधुनिकीकरण' विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया है। संगोष्ठी का आयोजन इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन (आईएनए) द्वारा किया गया था। आईएनए, देश में पौध नर्सरी व्यवसाय में लगे लोगों का एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन है।
संगोष्ठि में आए विशेषज्ञों ने कहा, भारत में नर्सरी का कारोबार तेजी से फैल रहा है। विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नर्सरी कारोबार में लगी कंपनियों का मुकाबला करने के लिए भारत में एक इंटरनेशनल हब स्थापित करना बहुत जरूरी है। इस तरह के हब में विभिन्न प्रकार के पौधे, उनसे जुड़ी सामग्री, संबंधित नर्सरी उत्पाद, उपकरण व सेवाओं आदि के साथ-साथ निर्यात और आयात की सुविधाएं भी होनी चाहिए। हब, इतने बड़े क्षेत्र में बनाया जाना चाहिए ताकि वहां पर नर्सरीमैन अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें। विदेश से आने वाले कारोबारियों को एक ही स्थान पर सभी तरह की सुविधाएं, मसलन होटल और रेस्तरां आदि भी उपलब्ध हों।
संगोष्ठी का उद्घाटन और बागवानी पर प्रदर्शनी 'इंटरनेशनल हॉर्टि एक्सपो' का शुभारंभ मुख्य अतिथि स्वामी चिदानंद सरस्वती, आध्यात्मिक प्रमुख, परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश, उत्तराखंड ने किया। उन्होंने पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर जोर दिया। चिदानंद सरस्वती ने कहा, जब एक लड़की पैदा होती है तो अखरोट, कीवी, खुबानी और सेब के पांच पौधे लगाने चाहिए। चंदन के दस पौधे लगाए जाएं। ये इसलिए, ताकि जब वह वयस्क हो जाए तो ये पेड़ उसके लिए एक संपत्ति बन सकें। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से अपने राज्य में नर्सरी व्यवसाय को बढ़ावा देने का आग्रह किया। स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना सभी का व्यवसाय बन जाना चाहिए। चूंकि मानवजाति का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर करता है, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हमारी प्रमुख चिंता होनी चाहिए। उन्होंने नर्सरी व्यवसाय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनकी भागीदारी बढ़ाने का भी आग्रह किया।
उत्तराखंड के शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, नर्सरी व्यवसाय को बढ़ावा देने में आईएनए की उपलब्धियां सराहनीय रही हैं। उत्तराखंड में स्कूलों को ग्रीन कैंपस में बदलने की योजना बनाई जा रही है। आईएनए के अध्यक्ष, वाईपी सिंह ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय नर्सरी हब स्थापित करने की मांग, केंद्र सरकार के पास लंबित है। भारतीय नर्सरी व्यवसाय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ऐसे नर्सरी हब की स्थापना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश भर में कार्यरत सभी प्रकार की नर्सरी हाई-टेक, लो-टेक, बड़ी, मध्यम और छोटी नर्सरी का राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराया जाए। इससे नर्सरियों के प्रामाणिक और आधिकारिक आंकड़े एकत्र किया जा सकेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उन सभी 100 स्मार्ट शहरों में स्मार्ट नर्सरी प्लांट स्थापित किए जाएं, जिन्हें केंद्र सरकार विकसित कर रही है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से महानगरीय शहरों में शहरी बागवानी को विकसित करने, बढ़ाने और पौधों के विभिन्न पहलुओं एवं स्वस्थ समाज बनाने के लिए लगातार सेमिनार कार्यशाला, प्रदर्शनी व मेले आदि आयोजित करने का आग्रह किया गया है।
पिछले दो तीन वर्षों के दौरान कोविड-19 महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के बावजूद, आईएनए ने नर्सरी विकास और प्रबंधन, टिशू कल्चर, भूनिर्माण, पौधों के विपणन से संबंधित विभिन्न विषयों पर 100 वेबिनार्स का आयोजन किया है। इसमें बागवानी, फूलों की खेती व ऊर्ध्वाधर उद्यान आदि विषयों पर चर्चा की गई। आईएनए द्वारा नियमित रूप से मासिक पत्रिका 'नर्सरी टुडे' का प्रकाशन किया जाता रहा है। आईएनए ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर एक नर्सरी पोर्टल शुरू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने पिछले साल नर्सरी पोर्टल का उद्घाटन किया था। केंद्र सरकार ने आईएनए के प्रयासों के चलते नर्सरी व्यवसाय पर गलती से लगाए गए जीएसटी को वापस ले लिया था। उद्यमियों को कृषि-बागवानी क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम के अलावा नर्सरी तकनीक में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया है ताकि नर्सरी क्षेत्र के लिए कुशल श्रमिकों को विकसित किया जा सके।