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Indian Navy: नौसेना को मिलेगा नया 'समुद्री प्रहरी' महेंद्रगिरि, दुश्मन के रडार को देगा चकमा; जानिए इसकी ताकत

Mon, 06 Jul 2026 03:38 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Navy's Stealth Frigate Mahendragiri: भारतीय नौसेना को 11 जुलाई को नया स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' मिलने जा रहा है। यह युद्धपोत दुश्मन के रडार से बचते हुए मिसाइल, पनडुब्बी और हवाई हमलों का जवाब देने में सक्षम है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण लगे हैं। आखिर महेंद्रगिरि को इतना खास क्यों माना जा रहा है? यह भारत की समुद्री ताकत को कितना मजबूत करेगा और इसकी सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?
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महेंद्रगिरि कितना घातक है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय नौसेना की ताकत जल्द ही और बढ़ने वाली है। 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट-17ए के तहत तैयार स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। यह केवल एक नया युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा तकनीक, आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा का नया प्रतीक भी है। अत्याधुनिक हथियारों और स्टील्थ तकनीक से लैस यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा।

महेंद्रगिरि को इतना खास क्या बनाता है?

महेंद्रगिरि पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। स्टील्थ तकनीक की वजह से यह दुश्मन के रडार पर सामान्य युद्धपोतों की तुलना में काफी कम दिखाई देता है। युद्ध के दौरान यह विशेषता इसे सामरिक बढ़त देती है और दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन बना देती है।

महेंद्रगिरि में कौन-कौन सी आधुनिक क्षमताएं हैं?

  • सतह से सतह पर मार करने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणाली।
  • सतह से हवा में मार करने वाली एयर डिफेंस मिसाइलें।
  • उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली।
  • अत्याधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम।
  • पनडुब्बियों का पता लगाने और हमला करने वाले हथियार।
  • एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, जो सभी हथियारों और सेंसर का संचालन करता है।
  • कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली।
  • सामान्य गश्त के दौरान कम ईंधन खपत और जरूरत पड़ने पर तेज रफ्तार।
  • लंबी दूरी तक लगातार समुद्री अभियान चलाने की क्षमता।
  • हर मौसम और अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी संचालन करने में सक्षम।

आत्मनिर्भर भारत के लिए यह क्यों अहम है?

महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में देश की बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने भी योगदान दिया है। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिली है और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बने हैं। यह युद्धपोत इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अत्याधुनिक युद्धपोतों का केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि उनका डिजाइन भी स्वयं करने में सक्षम हो चुका है।
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