भारतीय नौसेना ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी दी। नौसेना ने कई तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें संदिग्ध समुद्री लुटेरों की नौका को दिखाया गया है, जिसे भारतीय नौसेना के जवानों से भरी नौका ने घेरा हुआ है। नौसेना ने पोस्ट में लिखा कि हिंद महासागर में सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली सेना के रूप में भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा, समुद्री लुटेरों के खिलाफ अभियान चलाने और समुद्री आवागमन को मुक्त और सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय नौसेना की कार्रवाई
- फोटो : एक्स/भारतीय नौसेना
हिंद महासागर में समुद्री लुटेरों के खिलाफ कार्रवाई में भारतीय नौसेना कितनी तत्पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नौसेना ने समुद्री डकैती और ड्रोन विरोधी अभियानों के लिए छह युद्धपोत तैनात किए हैं। नौसेना ने अरब सागर और अदन की खाड़ी में भी समुद्री लुटेरों के खिलाफ अभियान चला चुकी है।
हाल के वर्षों में पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी के आसपास समुद्री डकैती की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार अपने युद्धपोतों और समुद्री निगरानी संसाधनों की तैनाती कर क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है। आईएनएस कोलकाता की यह कार्रवाई भारतीय नौसेना की त्वरित संचालन क्षमता और समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है नौसैनिक बल समुद्री सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। वहीं विभिन्न अवसरों पर स्वयं नौसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि आज समुद्री चुनौतियां एक देश तक सीमित नहीं हैं। चाहे फिर वह समुद्री डकैती हो, तस्करी, आतंकवाद या प्राकृतिक आपदा। उनका कहना है कि इनसे निपटने के लिए साझा रणनीति और संयुक्त कार्रवाई जरूरी है।