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बार्ज पी 305: डूबते जहाज पर कैप्टन ने छोड़ा साथ तो नौसेना ने बचाई दर्जनों की जिंदगी

Fri, 21 May 2021 07:07 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नौसेना के रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक 273 लोगों में से अब तक 188 को बचा लिया है। वहीं 49 शव भी बरामद किए हैं। फिलहाल, लापता लोगों की तलाश जारी 
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बार्ज p 305
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विस्तार
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पिछले कुछ दिनों में बार्ज का नाम काफी बार सुना पढ़ा होगा। दरअसल बार्ज एक सपाट तल वाली नाव होती है, जिसे विशेष रूप से नदी और नहर परिवहन में भारी माल की ढुलाई के लिए बनाया गया है। इस मामले में लापरवाही भी सामने आ रही है कि जब ताउते तूफान को देखते हुए चेतावनी जारी कर दी गई थी तो बार्ज पर मौजूद लोगों को समय रहते सुरक्षित जगह पर वापस क्यों नहीं बुलाया गया।

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लापता लोगों की तलाश जारी 
नौसेना की ओर से बुधवार को बताया गया कि बेहद खराब मौसम से जूझते हुए उसके जवानों ने बार्ज पी305 पर मौजूद 273 लोगों में से अब तक 188 को बचा लिया है। वहीं 49 शव भी बरामद किए हैं। 

नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार शाम तक पी305 पर मौजूद 188 कर्मियों को बचा लिया गया है। आईएनएस कोच्चि और आईएनएस कोलकाता इन लोगों को लेकर मुंबई बंदरगाह लौट रहे हैं। 
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प्रवक्ता ने कहा कि आईएनएस तेग, आईएनएस बेतवा, आईएनएस ब्यास, पी81 विमान और हेलीकॉप्टरों की मदद से लापता लोगों को ढूढ़ने के लिए तलाश एवं बचाव अभियान जारी है।

मुश्किल वक्त में जहाज से भागा कैप्टन
ताउते तूफान का मुकाबला भारतीय नौसेना ने बखूबी किया। भारतीय नौसेना 100 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले ताउते तूफान से भिड़कर अंधेरे में लोगों को बचा लाई।लेकिन आरोप है कि जहाज के जिस कैप्टन को ये काम करना चाहिए था, वो मुश्किल वक्त में पीठ दिखाकर भाग गया। 

चीफ इंजीनियर के भाई आलम शेख कहते हैं हवा की वजह से जहाज किसी अनजान प्लेटफॉर्म से टकराया और उसमें छेद हो गया। इस बीच कैप्टन वैसल से भाग गया। आरोप है कि जहाज के कैप्टन और कंपनी दोनों ने तूफान की अनदेखी की, जिसने 263 लोगों की जान को मुश्किल में डाल दिया।

कैप्टन ने कहा कुछ नहीं होगा
उन्होंने कहा कि जब आपको वॉर्निंग मिला तो आपने पुल आउट क्यों नहीं किया? सारे बोट आ गए थे शेल्टर में आप क्यों नहीं आए? मैंने बहुत बार कैप्टन को कहा वापस चलो, सेफ नहीं है, तूफान बढ़ेगा, लेकिन कैप्टन ने कहा कुछ नहीं होगा।

हवा की रफ्तार 40 से ऊपर नहीं जाएगी। लेकिन जब अचानक 100 के ऊपर हवा की रफ्तार पहुंची तो सभी एंकर टूट गए। कैप्टन पर जहाज की जिम्मेदारी थी, दावा है कि उसने न सिर्फ तूफान की अनदेखी की बल्कि वो अपने साथियों को मरने के लिए छोड़कर भाग गया। 

तब भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के जवानों ने लोगों को बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। जब समंदर की लहरें जिंदगी को निगलने के लिए बेताब हो रही थी, जब ऊंची-ऊंची लहरों पर कई जिंदगियां छटपटा रही थीं, तब नेवी के जवान देवदूत बनकर दर्जनों लोगों को नई जिंदगी देने के लिए पहुंच गए।

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