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Indian Navy: नौसेना को मिलेगा पहला 'एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट' INS अर्नाला, जानें इसकी खासियत

Fri, 06 Jun 2025 06:03 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईएनएस अर्नाला 18 जून 2025 को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया जाएगा। ये भारतीय नौसेना का पहला एएसडब्ल्यू - एसडब्ल्यूसी जहाज है। इसका निर्माण जीआरएसई और एलएंडटी ने मिलकर किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा उत्पादन नीति का बेहतरीन उदाहरण है।
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अर्नाला को कमीशन करने के लिए भारतीय नौसेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय नौसेना को 18 जून को एक नया और अत्याधुनिक जहाज मिलने जा रहा है। नौसेना के पहले एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह समारोह विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में होगा और इसकी अध्यक्षता जनरल अनिल चौहान, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष करेंगे। इस कार्यक्रम की मेजबानी उत्तरी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर करेंगे। इस मौके पर नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, विशिष्ट अतिथि, और जहाज निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
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आईएनएस अर्नाला के बारें में जानिए
आईएनएस अर्नाला भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे 16  एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट जहाजों में से पहला जहाज है। यह जहाज खासतौर पर तटीय इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस जहाज का निर्माण कोलकाता की कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने एलएंडटी शिपबिल्डर्स के साथ साझेदारी में किया है। यह साझेदारी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत हुई है।

आईएनएस अर्नाला का नाम महाराष्ट्र के वसई के पास स्थित ऐतिहासिक किले 'अर्नाला' के नाम पर रखा गया है, जो भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को सम्मान देता है। यह युद्धपोत 77 मीटर लंबा है और यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा डीजल इंजन-वॉटरजेट कॉम्बिनेशन से चलने वाला युद्धपोत है। इसकी विशेषताएं इसे अन्य जहाजों से अलग बनाती हैं।
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आईएनएस अर्नाला की खासियतें:
  • दुश्मन की पनडुब्बियों की निगरानी और उनका पता लगाने में सक्षम
  • तलाशी और बचाव अभियान में इस्तेमाल योग्य
  • तटीय इलाकों में खुफिया निगरानी
  • कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन में सहायक
  • अत्याधुनिक माइन बिछाने की क्षमता

'आत्मनिर्भर भारत' के तहत निर्माण
आईएनएस अर्नाला का निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत भारतीय रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमता को दर्शाता है। यह जहाज न केवल भारत में डिजाइन और निर्मित हुआ है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक और भारत में बने उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इस उपलब्धि से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता को और मजबूती मिलेगी। आईएनएस अर्नाला के नौसेना में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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