नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने सोमवार को मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के दूसरे डाइविंग सपोर्ट पोत (डीएसवी) 'निपुण' के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता की। इसके साथ ही नौसेना की गहरे समुद्र में गोताखोरी और पानी के भीतर अभियान चलाने की क्षमता को और मजबूती मिली है। यह निस्तार श्रेणी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट पोत है। इसका निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने विशाखापत्तनम में किया है। पोत को 30 जुलाई 2026 को नौसेना को सौंपा गया था।
आईएनएस निपुण को खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी और पानी के भीतर जटिल अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक डाइविंग उपकरण लगाए गए हैं और यह डीप सी सैचुरेशन डाइविंग अभियान संचालित करने में सक्षम है। इस तकनीक के जरिए प्रशिक्षित गोताखोर समुद्र की अधिक गहराई में लंबे समय तक काम कर सकते हैं। पोत में गोताखोरी अभियानों के लिए अलग डाइविंग स्टेज भी उपलब्ध है।
नौसेना में क्या होगी आईएनएस निपुण की भूमिका?
इस पोत की सबसे अहम भूमिकाओं में से एक पनडुब्बी बचाव अभियान है। आईएनएस निपुण को डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल यानी डीएसआरवी के मदर शिप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। किसी पनडुब्बी के समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त होने या उसमें सवार कर्मियों के फंसने की स्थिति में डीएसआरवी के जरिये उन्हें बाहर निकालने में मदद मिलेगी। इससे नौसेना की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी।
पोत में रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल यानी आरओवी की सुविधा भी है। ये पानी के भीतर गोताखोरों की निगरानी, वस्तुओं की जांच और सैल्वेज अभियानों में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा पोत में नौवहन, पोत प्रबंधन और समुद्र में अपनी स्थिति को सटीक बनाए रखने वाली आधुनिक प्रणालियां लगाई गई हैं। पानी के भीतर जटिल अभियानों के दौरान यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
गहरे समुद्र के अभियानों को देगा मजबूत आधार
आईएनएस निपुण में गोताखोरी, पानी के भीतर हस्तक्षेप और चिकित्सा सहायता से जुड़ी विशेष सुविधाएं भी हैं। यानी यह केवल गोताखोरों को समुद्र तक पहुंचाने वाला पोत नहीं है, बल्कि गहरे समुद्र में लंबे और जटिल अभियानों के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में काम करेगा।
इस पोत का निर्माण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन क्षमता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसे देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है तथा इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। निपुण का नौसेना में शामिल होना गहरे समुद्र में बचाव, गोताखोरी और पानी के भीतर हस्तक्षेप अभियानों के लिए भारत की क्षमता को बढ़ाने के साथ स्वदेशी युद्धपोत निर्माण को भी मजबूती देता है।
क्यों रखा गया नाम आईएनएस निपुण?
'निपुण' नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ किसी विशेष कार्य में दक्ष और कुशल व्यक्ति होता है। पोत की भूमिका भी इसी नाम के अनुरूप है, क्योंकि इसे समुद्र की गहराई में बेहद विशेष और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए तैयार किया गया है।