भारतीय नौसेना ने एंटी पाइरेसी और एंटी ड्रोन ऑपरेशन पर काफी गंभीरता से काम कर रही है। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बताया कि सेना आने वाले दिनों में समुद्र में तैनात युद्धपोतों की संख्या और बढ़ने वाली है। उन्होंने बताया कि फिलहाल नौसेना के छह युद्धपोत तैनात हैं। उन्होंने बताया कि युद्धपोत की संख्या बढ़ाने के संबंध में सरकार को एक प्रस्ताव सौंपा गया है। जल्द ही प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
नागरिकों को बचाना पहली प्राथमिकता
नौसेना प्रमुख ने बताया कि सरकारी नीति के अनुसार, हमें भारतीय नागरिकों की मदद करनी है, जहां भी वे संकट में हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वह यमन हो या कहीं और नौसैनिकों के दिमाग में बस संकट में मदद करने की ही बात थी। जब मैंने युद्धपोत आईएनएस चेन्नई और मार्कोस को रवाना करने को मंजूरी दी थी तो दिमाग में बस हाईजैक जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों को बचाने की बात थी। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि हमारे विमान और ड्रोन को हाईजैक जहाज के चारों तरफ सक्रिय देखकर समुद्री डाकू 4-5 जनवरी की रात में ही लिली नोरफोक से भाग गए थे।
नौसेना ने सूचना मिलने के बाद पहला एक्शन किया लिया
उन्होंने बताया कि डाकुओं के किसी और खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना ने जहाज की सघन तलाशी भी ली। नेवी चीफ एडमिरल आर हरि कुमार के मुताबिक, अरब सागर में हाईजैक जहाज एमवी लिली नोरफोक से 15 भारतीयों को बचाने की शुरुआत उस समय हुई, जब गुरुवार को पहली सूचना मिली। नौसेना ने पहली कार्रवाई के रूप में फॉरवर्ड मिशन पर तैनात जहाज आईएनएस चेन्नई को हाईजैक जहाज की ओर बढ़ने का निर्देश दिया, जो 400 मील की दूरी पर था।
समुद्री डाकुओं के हमले का अंदाजा कैसे हुआ
नौसेना प्रमुख के मुताबिक आईएनएस चेन्नई को रवाना करने के साथ-साथ चालक दल के साथ संवाद भी किया गया। ऐसा करने के लिए तुरंत अपना विमान लॉन्च किया गया। हमारे जहाज के आसपास लगभग 4-5 मछली पकड़ने वाली नावें थीं। इससे हमें सटीक अंदाजा हुआ कि समुद्री डाकुओं ने हमला किया है। इस ऑपरेशन में भारत सरकार के एंटी-पाइरेसी नियम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह नियम एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन संचालित करने में सहायक है।
नौसेना की राष्ट्रीय नीति
उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना नौसेना का कर्तव्य है। भले ही समुद्री सीमा में चुनौती कहीं भी मिल रही हो। नौसेना प्रमुख के मुताबिक हाईजैक जहाज पर भारतीय ध्वज नहीं था, लेकिन चालक दल भारतीय था। जब भी वे संकट में हों, उनकी मदद करना हमारी राष्ट्रीय नीति है। हमने वही किया।
हिंद महासागर को सुरक्षित रखने का संकल्प
नौसेना प्रमुख के मुताबिक सूडान और यूक्रेन में भी नेवी ने अपने देशवासियों को संकट से मुक्त कराने और सुरक्षित स्वदेश लाने की चुनौती स्वीकार की थी। नौसेना अधिकारियों को किसी भी कीमत पर समुद्री डकैती को रोकने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। हम हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
नौसेना की किस भूमिका की चर्चा हो रही है?
गौरतलब है कि ब्रिटेन के मैरिटाइम ट्रैफिक ऑर्गनाइजेशन ने बताया था कि शिप पर पहले 5-6 हाईजैकर्स मौजूद हैं। हालांकि, 15 भारतीयों को बचाने के लिए भारतीय नौसेना ने एक युद्धपोत, मैरिटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर्स और पी-8आई लॉन्ग रेंज एयरक्राफ्ट के अलावा प्रीडेटर एमक्यू9बी ड्रोन भी भेजा था। इन सबके अलावा नौसेना ने पूरे शिप को कब्जे से छुड़ाने के लिए अपनी इलीट मार्कोज टीम को भी उतारा। इस टीम को शिप में मौजूद हाईजैकर्स को मार गिराने के साथ सभी क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई।