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सिख दंगे के ‘दागी’ को पंजाब प्रभारी बनाने पर कांग्रेस घिरी

Mon, 13 Jun 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस महासचिव कमलनाथ को पार्टी की तरफ से पंजाब का प्रभारी बनाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल ने उन्हें 1984 के सिख दंगों में शामिल बताकर पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर हमला बोला है। कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष से पूछा है कि कमलनाथ 1984 दंगों की कथित संलिप्तता में दोषमुक्त हो गए हैं। शिरोमणि अकाली कल के प्रवक्ता दलजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सिख दंगे में शामिल होने वाले नेता को पंजाब का प्रभारी बनाकर इनाम दिया गया है।

कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आरोप को खारिज करते जुए कहा कि आप और शिरोमणि अकाली दल कमलनाथ के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं।
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‘दंगा पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़क रही कांग्रेस’

वहीं पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ को पंजाब का पार्टी प्रभारी बनाए जाने को आम आदमी पार्टी (आप) ने सिख दंगा पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने वाला बताया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस सिख दंगे में शामिल अपने नेताओं पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें पुरस्कृत कर रही है। कमलनाथ की पंजाब प्रभारी के तौर पर नियुक्ति इसी का परिणाम है।

आप नेता और वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने कहा कि कांग्रेस कमलनाथ को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आदेशों का पालन करने के बदले पुरस्कृत कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह गलत बयानबाजी कर रहे हैं कि सिख दंगों में कमलनाथ का पहली बार नाम 2010 में आया। इसके उलट गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में कमलनाथ का नाम बार-बार आया है। उस वक्त की खबरों से साफ पता चलता है कि कमलनाथ गुरुद्वारा रकाबगंज के बाहर जमा उपद्रवियों में मौजूद थे। वह वहां क्या कर रहे थे?

यदि वह गुरुद्वारे की रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। फुल्का ने कहा कि उनकी मौजूदगी की बात न सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है, बल्कि नानावती आयोग के सामने एक पीड़ित ने अपने हलफनामे में भी उनका नाम लिया है। अब कांग्रेस ने उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाकर पीड़ितों के घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है।

वहीं, संजय सिंह ने कहा कि दंगों के बाद से आज तक कांग्रेस की मानसिकता नहीं बदली है। दंगे में शामिल कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई करने की जगह तत्कालीन प्रधानमंत्री के आदेश पर काम करने वाले कमलनाथ को पुरस्कृत किया जा रहा है। सिंह ने केंद्र सरकार की एसआईटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि डेढ़ साल बाद अब एसआईटी कई मामलों की दोबारा जांच की बात कर रही है। उन्हें बताना चाहिए कि किन लोगों के खिलाफ मामले खुल रहे हैं। क्या इसमें कांग्रेसी नेताओं के मामले भी शामिल हैं या आपसी मिलीभगत से उन्हें बरी कर दिया जाएगा।
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