प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को भंग कर दिया। इसके लिए अध्यादेश लाया गया, जिसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को मंजूरी दे दी। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के संसद से पास होने तक पांच सदस्यीय कमेटी एमसीआई का कामकाज देखेगी। डॉ. वीके पॉल को इसका चेयरमैन बनाया गया है।
सरकार के इस फैसले ने एनएमसी का विरोध कर रहे डॉक्टरों को झटका दिया है। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सरकार के खिलाफ 28 सितंबर को मुंबई में देशभर के डॉक्टरों के साथ प्रदर्शन करने का फैसला किया है। नेशनल मेडिकल कमीशन को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बिल पेश किया था, लेकिन इसे स्थायी समिति के पास भेज दिया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस पर अध्यादेश लाकर बुधवार को इसकी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा था, जिसे उन्होंने अपनी मंजूरी दे दी।
उधर, डॉक्टरों का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल उनके अधिकारों का हनन है। जबकि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि आम जनता के हितों के लिए काम कर रही है।