रे कहा उन्हें भारत की प्रजातांत्रिक प्रणाली से लगाव है। भारत का चुनाव आयोग विश्व भर में प्रसिद्ध है। आयोग अच्छा काम कर रहा है। हालांकि वीवीपैट को उन्होंने 2010 से लागू न करने के मसले पर सवालिया निशान जरूर लगाया। उसने कहा वह चुनाव आयोग न गए हैं और न जाना चाहते हैं। पर वह यह अपेक्षा करते हैं कि आयोग को जरूर इस मामले में जांच करनी चाहिए।
बता दें कि आशीष रे ही वह व्यक्ति है जिसने 21 जनवरी को लंदन में बकायदा प्रेस वार्ता आयोजित की। उसमें उसने हैकर सईद शुजा को स्काइप लाइव चैट में पेश किया था। इसमें हैकर ने पत्रकारों को बताया था कि उसकी जान को खतरा है वह लंदन नहीं आ सकता वह अमेरिका में सशर्त शरण लिए है। हैकर ने दावा किया था कि वह उस टीम का हिस्सा था जिसने ईवीएम डिजाइन की थी। उसने दावा किया था कि गोपीनाथ मुंडे को इसलिए मारा गया क्योंकि वह 2014 के चुनाव के दौरान ईवीएम हैंकिग के मुद्दे से वाकिफ थे।
इस पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने हैकर पर प्राथमिकी दर्ज करा ईवीएम को तब ही क्लीन चिट देते हुए हैकिंग की संभावना से इंकार किया था। तब कांग्रेस ने हैकर के दावों की जांच की मांग की थी। उसने कहा था, क्योंकि यह मामला लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए जांच होनी चाहिए।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने बकायदा मेल पर बयान जारी कर आशीष को घेरा है। शरबानी बासु, मैंडी क्लार्क, रूपनजना दत्ता पूनम जोशी और प्रसून सोनवलकर ने कहा है कि यह प्रेस वार्ता बिना एसोसिएशन की पूर्ण सहमति से हुई थी। इसमें एसोसिएशन के न्यूनतम मानकों का पालन नहींहुआ था। एसोसिएशन के लवीना टंडन और संजय सूरी ने कहा इस तरह की वार्ता पत्रकारिता के मूल सिदांतों के विरुद्ध है।