भारतीय तीर्थयात्री योग माता मंदिर अकीलपुर, घोटकी, पानो अकील, सुक्कुर और ऐतिहासिक साधु बेला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों का भी दौरा करेंगे। तीर्थयात्री 14 जनवरी को ननकाना साहिब में भी एक दिन बिताएंगे और फिर अगले दिन भारत लौट आएंगे।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक मंदिर में शिव अवतारी सतगुरु संत शदाराम साहिब की 316वीं जयंती मनाने के लिए 84 हिंदू तीर्थयात्री रविवार को वाघा बॉर्डर से होते हुए पाकिस्तान पहुंचे। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। युशिष्ठर लाल के नेतृत्व में श्रद्धालुओं को पाकिस्तान लाया गया। वीजा जारी करना धार्मिक स्थलों की यात्रा पर पाकिस्तान-भारत प्रोटोकॉल, 1974 के समझौते के तहत आता है।
विज्ञापन
इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के प्रवक्ता गुलाम मोहयुद्दीन ने कहा, "युशिष्ठर लाल के नेतृत्व में भारत से 84 श्रद्धालु भगवान शिव के अवतार श्री गुरु स्वामी शदाराम साहिब की जयंती मनाने पाकिस्तान पहुंचे।" उन्होंने कहा कि ईटीपीबी तीर्थस्थल के अतिरिक्त सचिव सैफुल्ला खोखर ने वाघा बॉर्डर पर तीर्थयात्रियों का स्वागत किया। बोर्ड के अध्यक्ष सैयद अता-उर-रहमान की ओर से श्रद्धालुओं को गुलदस्ते भेंट किए। इसके बाद वे सीधे सिंध के शदानी दरबार हयात पिताफी के लिए रवाना हुए। यहीं कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
इस दौरान भारतीय तीर्थयात्री योग माता मंदिर अकीलपुर, घोटकी, पानो अकील, सुक्कुर और ऐतिहासिक साधु बेला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों का भी दौरा करेंगे। तीर्थयात्री 14 जनवरी को ननकाना साहिब में भी एक दिन बिताएंगे और फिर अगले दिन भारत लौट आएंगे। सीमा पर पत्रकारों से बात करते हुए सैफुल्ला खोखर ने बताया कि हिंदू श्रद्धालुओं को लिए फुलप्रूफ सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के साथ सभी प्रकार के इंतजाम किए गए हैं।
विज्ञापन
सैफुल्ला खोखर ने आगे कहा कि पाकिस्तान अपने अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों को संरक्षित करने और पड़ोसी देशों से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग ने इस आयोजन के लिए भारतीय तीर्थयात्रियों को 94 वीजा जारी किए, लेकिन उनमें से केवल 84 ने ही पाकिस्तान की यात्रा की।