अक्सर हम सभी को अपने सर्टिफिकेट खोने या फटने का डर सताता रहता है। आपकी इसी परेशानी को दूर करने के लिए भारत सरकार शिक्षा में डिजिटल सर्टिफिकेट देने की योजना बना रही है। इन्हें कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए 2019 में ग्रैजुएट होने वाले छात्रों को दिया जाएगा। दिल्ली विश्विद्यालय और बॉम्बे के कॉलेज इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी।
ट्रायल भारत सरकार के थिंक-टैंक
नीति आयोग की देखरेख में पूरा किया जा चुका है। एक सूत्र ने बताया- जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी और एक बार इसके सफलतापूर्वक खत्म हो जाने पर इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। प्लान डिजिटल सर्टिफिकेट को ब्लॉकचेन तकनीक की मदद से साल 2019 के बाद जारी करने का है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि वह क्रिप्टोकरेंसी पर नकेल कसेंगे लेकिन विकसित समाधानों के लिए ब्लॉकचेन के इस्तेमाल को जारी रखेंगे।
सूत्र ने आगे बताया कि भूमि रिकॉर्ड भी ब्लॉकचेन के अंतर्गत आने वाला मामला है जिसके बारे में काफी बातें होती हैं। इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा समय लगेगा क्योंकि बहुत से राज्य अपने भूमि के रिकॉर्ड को अभी तक डिजिटाइज नहीं करवा पाए हैं। शिक्षा की इस स्कीम को पहले ही टेस्ट किया जा चुका है और यह भूमि रिकॉर्ड की तुलना में कम जटिल प्रक्रिया है।