भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त मात्रा में है तथा इसमें और 5-8 फीसदी की गिरावट से हालात पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। डीबीएस ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही।
वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी के मुताबिक, चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल ने डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट को रोकने के लिए इस साल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को आक्रामक ढंग से हस्तक्षेप के लिए बाध्य किया, परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय कमी आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया गिरावट के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अधिकांश पैमानों पर पर्याप्त है। बाहरी उतार-चढ़ाव के जोखिम के मद्देनजर, इसमें 5-8 फीसदी की और गिरावट की संभावना बनती है, लेकिन इसका हालात पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है।
डीबीएस के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत में विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 403 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 426 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था। इस गिरावट का प्रमुख कारण अप्रैल के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी रही।
इस साल अब तक डॉलर की तुलना में अन्य मुद्राओं के मुकाबले रुपया सबसे बद्तर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में रहा और वैश्विक अनिश्चितता तथा महंगाई को लेकर चिंता के कारण यह 69 के स्तर को पार कर गया है। एजेंसी