राफेल लड़ाकू विमान की खरीद में दोबारा गरमाए घोटाले के आरोपों के बीच मंगलवार को वह भारतीय कंपनी भी सामने आई, जिस पर फ्रांसीसी मीडिया ने इस सौदे में ‘बिचौलिया’ के तौर पर कमीशन खाने का आरोप लगाया था। कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने राफेल की निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन को इस विमान के 50 नकली मॉडल (प्रतिकृति) सप्लाई की थीं।
फ्रांसीसी पब्लिकेशन मीडियापार्ट ने अपने देश की एंटी करप्शन एजेंसी की एक जांच के हवाले से रिपोर्ट पेश की थी कि दसॉल्ट एविएशन ने डेफसिस सॉल्यूशंस को 10 लाख यूरो (करीब 8.51 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। यह भुगतान विमान के 50 मॉडलों के लिए किया गया था, जो ‘तोहफे’ में दिए जाने थे। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एजेंसे फ्रांस एंटीकरप्शन के इंस्पेक्टरों को इन मॉडलों के बनाए जाने का कोई सबूत नहीं मिला था।
इस रिपोर्ट के बाद भारतीय राजनीति सोमवार को एक बार फिर राफेल खरीद घोटाले के शोर से गरमा गई थी। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को घेरा था। वहीं सरकार ने सारे आरोप खारिज किए थे। मंगलवार को डेफसिस सॉल्यूशंस ने भी टैक्स रसीदें पेश करते हुए इन आरोपों को गलत ठहराने का प्रयास किया।
कंपनी ने कहा, यह मीडिया में सामने आए उन निराधार, बेबुनियाद और भ्रामक दावों का जवाब है, जो कहते हैं कि डेफसिस ने राफेल विमानों के 50 प्रतिकृति मॉडल की आपूर्ति नहीं की है। कंपनी ने कहा, दसॉल्ट एविएशन को राफेल विमानों के 50 प्रतिकृति मॉडल की आपूर्ति की गई थी। यह आपूर्ति उस खरीद आर्डर के आधार पर की गई थी, जो इस प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी ने दिया था। कंपनी ने कहा, संबंधित अधिकारियों के पास इन मॉडलों की आपूर्ति से जुड़े डिलीवरी चालान, ई-वे बिल और जीएसटी रिटर्न विधिवत तरीके से जमा किए गए थे।