impeachment against President Donald Trump
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 24 फरवरी की संभावित भारत यात्रा को लेकर देश के किसान आशंकित हैं। किसान संगठनों ने ट्रंप की यात्रा का विरोध करने का एलान किया है। किसानों को डर है वह अमेरिका कृषि क्षेत्र के लिए कम आयात शुल्क पर व्यापार समझौते के लिए आ रहे हैं, जो उनके हितों पर असर डालेगा। इसलिए देश भर के किसान पीएम नरेंद्र मोदी से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का अनुरोध करेंगे।
बता दें कि अमेरिका भारत में पिस्ता, दुग्ध उत्पादों, सेब, अखरोट, बादाम, सोयाबीन, गेहूं, मक्का, मुर्गी पालन के उत्पादों जैसे आम खपत वाली चीजों को न्यूनतम आयात शुल्क पर निर्यात करने का इच्छुक है। किसान संगठन इस संबंध में अमेरिका के साथ किसी समझौते को किसानों के हकों पर कुठाराघात मानते हैं। इसलिए किसान 17 फरवरी को उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र समेत 250 से ज्यादा जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे और पीएम को एक ज्ञापन भी देंगे।
अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार
राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार कक्काजी के अनुसार अमेरिका अपनी निर्यात आधारित खेती को बचाने के लिए नए बाजार ढूंढ रहा है क्योंकि उसका निर्यात घटकर एक फीसदी के करीब रह गया है। इसलिए वह भारत को एक बड़े बाजार के रूप में देख रहा है।
अमेरिका करता है नियमों की अनदेखी
किसान नेता अभिमन्यु कोहार ने कहा कि अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि भारत 42 हजार करोड़ का आयात बहुत कम शुल्क के कृषि व्यापार समझौता करें। अमेरिका खुद ही विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ के कृषि नियमों की अनदेखी करता है। अमेरिका ने अपने देश के किसानों को डब्ल्यूटीओ के नियमों के खिलाफ जाकर 2014-15 में पहले दस साल के लिए अमेरिका ने 966 अरब यूएस डालर की सब्सिडी दी, फिर उसमें 2019-20 में 868 अरब यूएस डालर की सब्सिडी फिर जारी कर दी। ऐसे में भारतीय किसान इसका कैसे मुकाबला करेगा।