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MEA: ट्रूडो की कथनी और करनी में अंतर, सियासी कारणों से दे रहे भारत विरोधी तत्वों को समर्थन

Fri, 18 Oct 2024 04:08 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

बिना ठोस सबूताें के भारत पर झूठे आरोप लगाने की कनाडाई पीएम की स्वीकारोक्ति के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने दो-टूक कहा, दोनों देशों के रिश्तों को हुए नुकसान के लिए सिर्फ ट्रूडो जिम्मेदार हैं।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर भारत-विरोधी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप दोहराते हुए भारत ने साफ कहा कि उनकी सरकार खुले तौर पर हिंसा और अलगाववाद का समर्थन कर रही है। दहशतगर्दी और अलगाववाद को लेकर ट्रूडो की कथनी और करनी में अंतर है। राजनीतिक कारणों से ऐसे तत्वों को हर तरह से पोषित किया जा रहा है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के बदमाशों को गिरफ्तार करने के आग्रह समेत भारत के 26 प्रत्यर्पण अनुरोधों को भी अनदेखा किया गया।

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बिना ठोस सबूताें के भारत पर झूठे आरोप लगाने की कनाडाई पीएम की स्वीकारोक्ति के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने दो-टूक कहा, दोनों देशों के रिश्तों को हुए नुकसान के लिए सिर्फ ट्रूडो जिम्मेदार हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल बृहस्पतिवार को कहा, सभी को पता है कि पीएम ट्रूडो किन सियासी कारणों से खालिस्तान समर्थक हरदीपसिंह निज्जर की हत्या मामले में मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। सच यह है कि कनाडा ने भारत को सबूत का एक टुकड़ा तक नहीं दिया है। जायसवाल ने कहा, भारत सरकार ने सुरक्षा कारणों से ओटावा से अपने राजनयिकों को बुलाने का फैसला किया, इसके बाद वहां की सरकार ने उन्हें निष्कासित करने की घोषणा की।

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर संरक्षण मंजूर नहीं
ट्रूडो के उस बयान पर कि कनाडा में लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी है, जायसवाल ने कहा, इसके नाम पर देश तोड़ने वाले तत्वों का संरक्षण भारत को स्वीकार्य नहीं है। जायसवाल ने कहा, हमने बार-बार आग्रह किया कि ऐसे लोग जो कनाडा में भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।  
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जिनका मांगा प्रत्यर्पण, वही कर रहे अपराध
रणधीर जायसवाल ने कहा कि कनाडा की पुलिस का आरोप है कि भारत सरकार के एजेंट लॉरेंस गिरोह के जरिये कनाडाई नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। असलियत यह है कि इन गिरोहों के प्रत्यर्पण के भारत के अनुरोध की कनाडा ने लगातार अनदेखी की। कितना अजीब है, अब वही पुलिस दावा कर रही है कि ये अपराधी कनाडा में अपराध कर रहे हैं, जिसके लिए वह भारत को दोषी ठहराता रहा है।  

भारत पर आरोप लगाने से बदलाव नहीं
जायसवाल ने कहा, कनाडा में भारतीय मूल के पत्रकार भी निशाने पर हैं। ऐसा वे कर रहे हैं, जो खुलकर अलगाववाद को बढ़ावा देते हैं। यह उदाहरण है कि आज कनाडा किस स्थिति में है। भारत पर आरोप लगाने से इसमें बदलाव नहीं आएगा  

आतंकी गतिविधियों में वांछितों को गिरफ्तार नहीं किया
जायसवाल ने पांच ऐसे अपराधियों के नाम भी बताए जिनकी गिरफ्तारी के लिए भारत ने कनाडा को अनुरोध भेज रखा है। उन्होंने कहा, गुरजीत सिंह, गुरजिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, लखबीर सिंह लंडा, अर्शदीप सिंह गिल आतंकी गतिविधियों में वांछित हैं लेकिन कनाडा ने इनकी गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

मजबूत रिश्तों का कनाडा को ज्यादा लाभ
दोनों देशों के रिश्ते आगे किस दिशा में बढ़ेंगे, इस बारे में जायसवाल ने कहा, हमारे आर्थिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। भारतीय मूल के लोगों की वहां बहुत बड़ी आबादी है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत पुल का काम करते हैं। ऐसे में हमें देखना होगा कि ट्रूडो सरकार के आधारहीन आरोपों से संबंध किस ओर जाते हैं। वैसे हमारे मजबूत संबंधों से कनाडा ज्यादा बड़ा लाभ हासिल कर रहा है।

शेख हसीना मामले में नहीं बदलेगा रुख
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के संदर्भ में प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व पीएम सुरक्षा कारणों से अचानक भारत आईं थीं। इस मामले में वर्तमान स्थिति जारी रहेगी। इसके साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश में जब तक कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य नहीं होती तब तक विस्तृत वीजा सुविधा बहाल करना संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई।


विदेश मंत्रालय - हम शांति सैनिकों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेते हैं
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूनिफिल) परिसर पर हमलों की रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेती है।

दक्षिणी लेबनान के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ब्लू लाइन पर कोई भारतीय सैनिक तैनात नहीं है, लेकिन वहां तैनात सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। हमने यूनिफिल परिसर की सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर तरह की कार्रवाई करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिसर की अनुल्लंघनीयता का सभी को सम्मान करना चाहिए। गौरतलब है कि 11 अक्तूबर को इस्राइली टैंकों के हमले में दो इंडोनेशियाई शांतिरक्षक घायल हो गए थे। इस दौरान इस्राइली बलों की ओर से यूनीफिल टॉवर को निशाना बनाया गया था।

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