कनाडा की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भारत के साथ इसके रिश्ते तनावपूर्ण हैं। भारतीय राजनयिक संजय वर्मा ने खालिस्तानी आतंकियों के प्रत्यर्पण के अनुरोधों को लटकाने को लेकर कनाडा को घेरा। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से कुल 26 अनुरोध भेजे गए, जिनमें पांच को छोड़कर बाकी किसी मामले में कुछ नहीं किया गया। भारतीय राजदूत ने इसे कनाडा की निष्क्रियता का परिणाम बताया। उन्होंने बताया कि जिन मामलों का समाधान किया गया, उन पांचों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही है।
गैंगस्टर के खिलाफ प्रत्यर्पण के मामले लंबित
हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए इनके बारे में जानकारी देने से इन्कार कर दिया कि वह इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। संजय वर्मा ने कहा कि बाकी के 21 मामले दशकों से लंबित हैं। अब, पिछले चार-पांच या 10 वर्षों में कोई कार्रवाई न किए जाने को निष्क्रियता के अलावा और क्या कहा जा सकता है। हाल ही में विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक गुरजीत सिंह, गुरजिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, लखबीर सिंह लांडा और अर्शदीप सिंह गिल आदि आतंकियों और गैंगस्टर के खिलाफ प्रत्यर्पण के मामले लंबित है।
इतनी ही हमदर्दी है, तो अपने यहां खालिस्तान बना दे
संजय वर्मा ने कहा कि कनाडा में सिखों का एक बहुत छोटा-सा समूह ही खालिस्तान समर्थक है। अगर कनाडा को उनके साथ इतनी ही ज्यादा हमदर्दी है तो वह उन्हें अपने यहां अलग जगह दे दे और उसे ही खालिस्तान का नाम दे दे। उन्होंने दो-टूक कहा कि भारत में कभी खालिस्तान नहीं बन सकता। भारतीय राजनयिक ने कहा कि खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकी भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं। ये कनाडाई नागरिक हैं जो भारतीय संप्रभुता के लिए चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने कहा, ये खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी जब तक कनाडा के बारे में बात करें, कोई समस्या नहीं है। यह उनका घरेलू मुद्दा है।