आम चुनाव में मतदान बढ़ाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग के फैसलों और उठाए गए कदमों ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावी पर्व को यादगार बना दिया। आयोग ने कहीं शिपिंग कंटेनर में मतदान केंद्र बनाया, तो दिव्यांगों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था की। पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर बुजुर्गों को घर बैठे वोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
निष्पक्ष चुनाव के लिए मणिपुर की दो लोकसभा सीटों को पांच बार मतदान प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस दौरान 23 देशों के 75 प्रतिनिधि लोकतंत्र के इस महापर्व में एक अरब मतदाताओं की आहुति के गवाह बने। मतदाताओं की यह संख्या अमेरिका की जनसंख्या का तीन गुना तो यूरोपीय यूनियन की जनसंख्या से दो गुना है।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए खास व्यवस्था
मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए आयोग ने इस बार 85 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और 40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं को घर बैठे मतदान कराने की पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था की। इंदौर में 70 दृष्टिहीन लड़कियों के मतदान के लिए निशुल्क वाहन की व्यवस्था की गई। चुरू में पहली बार एक ही परिवार के आठ दिव्यांग मतदाताओं ने घर से ही वोट डाला।
मणिपुर ने बनाया इतिहास
हिंसा प्रभावित मणिपुर में आयोग ने मणिपुर बाहरी सीट पर दो चरणों और मणिपुर भीतरी पर एक चरण में मतदान होना था। हालांकि हिंसा, बूथ कैप्चरिंग की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मणिपुर बाहरी के छह और भीतरी सीट के 11 बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया। ऐसे में इन दो सीटों को पांच बार मतदान प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
दूसरी सबसे लंबी चुनावी प्रक्रिया 18वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया दूसरी सबसे लंबी प्रक्रिया रही। पहला चुनाव करीब चार महीने चला था। इस बार 81 दिन की होगी। पिछला चुनाव 75 दिन में पूरा हुआ था। इस बार चुने हुए जनप्रतिनिधि नई संसद भवन में शपथ लेंगे।
दृष्टिबाधितों के लिए ईवीएम में विशेष प्रावधान चुनाव आयोग ने दृष्टिबाधित मतदाताओं की सहायता के लिए ईवीएम में ब्रेल, ब्रेल सक्षम ईपीआईसी और मतदाता पर्ची के लिए भी प्रावधान किए। दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अंग्रेजी व हिंदी में एक मतदाता मार्गदर्शिका उपलब्ध कराई गई, जिसमें पंजीकरण से लेकर मतदान दिवस तक की सुविधा की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
जनजातीय मतदाताओं के लिए अहम उपाय
चुनाव आयोग ने जनजातीय मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की। गुजरात के अलियाबेट में एक शिपिंग कंटेनर में मतदान केंद्र स्थापित किया गया। छत्तीसगढ़ के बस्तर और कांकेर संसदीय क्षेत्र के 102 गांवों के मतदाताओं के लिए उनके गांव में ही मतदान केंद्र स्थापित किए गए। इनमें से कई मतदाताओं ने पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल किया।