भारत अगर कृषि और उद्योग पर ध्यान दे तो वह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन को भी पछाड़ सकता है। ऐसा अगर हो गया तो भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों वाली सूची में शामिल हो जाएगा। ये रिपोर्ट ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी ने जारी की है। विशेषज्ञों के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था को कृषि और उद्योग पर ध्यान देने से लाभ मिलेगा।
फ्रांस को पीछे छोड़ चुका है भारत
पीडब्ल्यूसी का कहना है कि साल 2019 में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर उसकी जगह पांचवें नंबर पर आ सकता है। साल 2017 में भारत ने फ्रांस को पीछे छोड़ छठा स्थान हासिल किया था। पहले स्थान पर अमेरिका, दूसरे पर चीन और तीसरे पर जापान ने अपनी जगह बनाई हुई है। वहीं ब्रिटेन पांचवें नंबर पर है। भारत इस साल ब्रिटेन को इसलिए पीछे छोड़ सकता है क्योंकि यूरोपीय संघ से बाहर होने के बाद उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस मामले पर केंद्रीय वाणिज्य, नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु का कहना है कि आने वाले 7-8 साल में भारत की अर्थव्यवस्था 356 लाख करोड़ रुपये हो सकती है।
कितनी रह सकती है जीडीपी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन और फ्रांस दो ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या लगभग बराबर है, साथ ही दोनों विकास के मामले में भी एक जैसे हैं। तो दोनों का एक दूसरे को पछाड़ते रहना बेहद आम बात है। वहीं अगर भारत की बात करें तो वह पांचवां स्थान हासिल करने के बाद उसपर लंबे समय तक रह सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की आपूर्ति अगर ठीक रही और वैश्विक अर्थव्यवस्था में कोई उथलुथल न हुई तो साल 2019-20 तक भारत की जीडीपी 7.6 फीसदी रह सकती है। वहीं फ्रांस की जीडीपी ग्रोथ 1.7 फीसदी और ब्रिटेन की जीडीपी ग्रोथ 1.6 फीसदी रहने की संभावना है।
वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। वहीं 2018 और 2019 में ब्रिटेन की विकास दर में कमी देखी गई। इसके अलावा यूरो के मुकाबले पाउंड के कमजोर रहने से भी उसे नुकसान होगा। भारत सरकार की नीतियों और जीएसटी से भी देश की विकास दर को फायदा होगा।
अगर वैश्विक स्तर पर गौर करें तो 2019 में मंदी रहने के आसार हैं। साल 2016 के आखिर और 2018 की शुरुआत में जो तेजी देखी गई थी वो अब थम गई है। 2019 में दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की जीडीपी औसत के आसपास रहने के आसार हैं।
चीन से आगे निकला भारत भारत
जीडीपी के मामले में भारत ने 28 साल बाद पड़ोसी देश चीन को बड़ी मात दे दी है। चीन की विकास दर दिसंबर में खत्म हुई तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी दर घटकर 7.1 फीसदी रह गई थी। यह पहली तिमाही में 8.2 फीसदी थी। इस हिसाब से इसमें 1.1 फीसदी की कमी देखने को मिली है। वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट में बीते साल कहा गया था कि साल 2019 में एशिया में आर्थिक वृद्धि धीमी होगी।