आज के दिन भारतीय संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान दिवस के मौके पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि जब इसे लागू किया गया तो तो हमारे संविधान की काफी आलोचना की गई। सर इवर जेनिंग्स ने भारतीय संविधान को लंबा और पेचीदा बताकर इसकी आलोचना की थी। समय ने आलोचना कमजोर कर दी और यह गर्व की बात है कि हमारा संविधान पिछले 7 दशकों से साहस और हिम्मत के साथ खड़ा हुआ है। सीजेआई ने आगे कहा कि हमारा संविधान बहुमत और समझदारी की आवाज है। संकट के क्षण में ये हमें मार्गदर्शन करना जारी रखता है।
रंजन गोगोई ने सोमवार को कहा कि संविधान के सुझावों पर ध्यान देना ‘हमारे सर्वश्रेष्ठ हित’ में है और ऐसा नहीं करने से अराजकता तेजी से बढ़ेगी। प्रधान न्यायाधीश ने यहां संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में कहा कि संविधान हाशिए पर पड़े लोगों के साथ ही बहुमत के विवेक की भी आवाज है और यह अनिश्चितता तथा संकट के वक्त में सतत् मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘संविधान की बातों पर धयान देना हमारे सर्वश्रेष्ठ हित में है और अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो हमारा घमंड तेजी से अव्यवस्था में तब्दील हो जाएगा।’’ गोगोई ने कहा, ‘‘संविधान भारत की जनता के जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। यह कोई अतिश्योक्ति नहीं है, अदालतें रोजाना जिस प्रकार के भिन्न मुद्दों पर सुनवाई करतीं है उसे लोगों को देखना चाहिए।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारा संविधान हाशिए पर पड़े लोगों के साथ ही बहुमत के विवेक की आवाज है। इसका विवेक अनिश्चितता तथा संकट के वक्त में हमारा मार्गदर्शन करता है।’’ उन्होंने कहा कि जब संविधान लागू किया गया था उस वक्त व्यापक पैमाने पर इसकी आलोचना हुई थी लेकिन वक्त ने आलोचनाओं को कमजोर किया और बेहद गर्व की बात है कि पिछले अनेक दशक से इसका जिक्र बेहद जोश के साथ किया जा रहा है।
उन्होंने कहाकि संविधान‘‘वक्त से बंधा दस्तावेज भर नहीं है’’ और आज जश्न मनाने का नहीं बल्कि संविधान में किए गए वादों की परीक्षा लेने का वक्त है। न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, ‘‘क्या हम भारतीय आजादी, समानता और गरिमा की शर्तों के साथ जी रहे हैं? ये ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें मैं खुद से पूछता हूं। निसंदेह काफी तरक्की हुई है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। आज हमें सिर्फ जश्न नहीं मनाना चाहिए बल्कि भविष्य के लिए एक खाका तैयार करना चाहिए।’’ गौरतलब है कि 26 नवम्बर को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बता दें की भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को जाना जाता है। अम्बेडकर भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया। भारतीय संविधान को दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। दुनिया के संविधानों में से अलग-अलग कानून और आर्टिकल लेकर इसका निर्माण हुआ। इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं। यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था।
26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा की तरफ से इसे अपनाया गया और 26 नवंबर 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया। यह वजह है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करनेवाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी। संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित और कॉलीग्राफ्ड थी। इसमें किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का इस्तेमाल नहीं किया गया था। संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। दो दिन बाद इसे लागू किया गया था।