चीन के काम करने के तरीके पर भारतीय कंपनियों की पारदर्शिता बराबर भारी पड़ती है। कई देशों ने तो चीन के ठेके को रद्द कर भारतीय कंपनियों को कंस्ट्रक्शन का ठेका भी दिया है। जबकि चीन विदेशों में भारतीय कंपनियों के राह को कठिन करने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ता।
भारतीय रेलवे के उपक्रम इरकॉन के सीएमडी एसके चौधरी ने बताया कि चीन की कंपनियों ने इरकॉन को ना सिर्फ ईरान बल्कि, बांग्लादेश, मलेशिया समेत खाड़ी के कई देशों में प्रतिद्वंद्विता देने की कोशिश की है, लेकिन भारतीय कंपनी की पारदर्शी नीति चीन की ऋणजाल नीति व कामकाज के तरीके पर भारी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ईरान की माफना व फराब के साथ इरकॉन ने करार किया है। ये कंपनियां इरकॉन के साथ भारत, ईरान समेत अन्य देशों में भी मिल कर काम करेंगी।
मीडिया से बातचीत में एसके चौधरी ने बताया कि मलेशिया ने चीन की कंपनी को दिए गए कुछ ठेके को निरस्त भी किया है। मलेशिया में इरकॉन 50 प्रतिशत से अधिक काम कर रहा है। श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, लाओस, मालदीव में रेलवे के उपक्रम को कई प्रोजेक्ट मिले है। अमेरिका ने फिलिपिंस में एक प्रोजेक्ट के लिए फंड दे रहा है। पुल एवं रेलवे लाइन का ठेका फिलिपिंस में हासिल किया गया है।
ईरान में चाबहार बंदरगाह के बारे में बताया कि इस योजना में इरकॉन पूरी तरह से भागीदारी निभा रहा है। चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान की सीमा स्थित जाहेदान तक रेल ट्रैक बिछाने की परियोजना से इरकॉन बाहर नहीं हुआ है। कोविड-19 व अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह परियोजना अटकी हुई है। ईरान में जिस कंपनी के साथ करार इरकॉन का हुआ था उसपर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है। ईरान सरकार की तरफ से काम का ठेका खत्म करने का औपचारिक सूचना या पत्र नहीं मिला है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, सफदरजंग रेलवे स्टेशन पुर्ननिर्माण का काम भी इरकॉन ही कर रहा है।