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महिलाओं को टॉप पोस्ट के लिए 'फिट' नहीं मानती भारतीय कंपनियां

Sat, 12 May 2018 04:56 PM IST
हरेन्द्र कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो, जहां महिलाओं ने अपनी कुशलता का लोहा न मनवाया हो। बावजूद इसके कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफालताएं हासिल करने के बाद भी भारतीय कंपनियों में महिलाएं नेतृत्व वाले अहम ओहदों पर नहीं हैं। लैंगिक समानता पर किए गए फिक्की के हालिया सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। 

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फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (फिक्की) के महिला संगठन फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन ने पहली बार देश की कंपनियों में लैंगिक समानता पर सर्वे किया है। इस स्टडी के मुताबिक केवल 6 फीसदी कंपनियों ने ही माना कि उनके यहां लैंगिक भेदभाव नहीं है और महिलाओं और पुरुषों की बराबर हिस्सेदारी है। जबकि 31 फीसदी कंपनियों ने माना कि उनके यहां 5 फीसदी से भी कम महिलाएं सीनियर मैनेजमेंट पोजीशंस पर हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्कप्लेस के ये आंकड़े वाकई उस सच्चाई से बिल्कुल अलग हैं कि महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े रही हैं। सच्चाई यह है कि वरिष्ठता की सीढ़ी पर चढ़ना एक महिला के लिए काफी कठिन होता है। महिलाओं के प्रति कंपनियों का यह रुख दर्शाता है कि कंपनियां अभी तक महिलाओं के करियर ग्रोथ के लिए सही माहौल तैयार नहीं कर पाई हैं। 
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सर्विस सेक्टर 'बेस्ट परफॉर्मर'

सर्वे में इंडस्ट्री में 3 सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और ट्रेडिंग ने बहुत बेहतर नहीं किया है, लेकिन सर्विसेज सेक्टर ने सबसे ज्यादा महिलाओं को नौकरी पर रखा है। साथ ही सभी विभागों में उनका प्रतिनिधित्व है। वहीं ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग में महिलाएं उनकी फर्स्ट च्वाइस नहीं हैं। या फिर यह कह सकते हैं कि वे जानबूझकर महिलाओं को रोजगार नहीं दे रहे हैं। 

हालांकि इस स्टडी में एक बात जो सुकून देने वाली थी, कि 66 फीसदी कंपनियों ने माना कि समान जॉब लेवल पर महिलाओं और पुरुषों को बिना किसी भेदभाव के एक समान सैलरी मिल रही है। केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में समान जॉब लेवल पर पुरुष महिलाओं से दोगुनी सैलरी ले रहे थे। वहीं महिलाओं के लीडरशिप पोजिशंस में इस सेक्टर ने सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

कागजों पर है लैंगिक संवेदनशीलता

मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग सेक्टर के मुकाबले बेहतर करने के बावजूद सर्विस सेक्टर में यौन उत्पीड़न वाले और लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति असंवेदनशील दिखाई दिया। इस सेक्टर से जुड़ी लगभग 42 फीसदी कंपनियों का मानना है कि लैंगिक समानता को लेकर उनके पास कोई पॉलिसी नहीं है। वहीं कुछ कंपनियों ने लैंगिक समानता पर अपनी पॉलिसी बना तो रखी हैं, लेकिन उनके लागू करने और उसे प्रमोट करने को लेकर गंभीर नहीं हैं। सर्वे के मुताबिक इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकांश कंपनियों ने लैंगिक समानता पर अपनी पसंद के मुताबिक पॉलिसी बना तो रखी है या फिर उनके निष्पादन या समीक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।

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