अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने के लिए भारतीय तटरक्षक बल जल्द ही रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) शामिल करने जा रहा है। इसकी जानकारी देते हुए महानिदेशक परमेश शिवमणि ने कहा कि नई तकनीक और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय तटरक्षक बल जल्द ही अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने के लिए रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) शामिल करने जा रहा है। यह जानकारी तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने रक्षा मंत्रालय की तरफ से साझा एक पॉडकास्ट में दी। उन्होंने बताया कि कोस्टल सर्विलांस नेटवर्क प्रोजेक्ट का दूसरा चरण इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा। फिलहाल पहले चरण में 46 रडार स्टेशन पूरी तरह काम कर रहे हैं, जबकि दूसरे चरण में 38 रडार स्टेशन जोड़े जाएंगे।
तटरक्षक बल का सफर और मौजूदा क्षमता
1978 में सिर्फ नौसेना से मिले दो जहाजों के साथ शुरू हुआ तटरक्षक बल आज 205 जहाज और क्राफ्ट, और 78 विमान (फिक्स्ड-विंग और हेलिकॉप्टर) चला रहा है। इनके अलावा 14 होवरक्राफ्ट भी तैनात हैं, जो उथले पानी और क्रीक इलाकों में निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं।
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हाल की बड़ी समुद्री घटनाएं
शिवमणि ने हाल में भारतीय जलक्षेत्र में हुई दो घटनाओं का जिक्र किया, जून में सिंगापुर के झंडे वाला मालवाहक जहाज एमवी वान हाई 503 में आग लगना। मई में लाइबेरियन कंटेनर जहाज एमएससी ईएलएसए 3 का कोच्चि तट के पास डूबना। इन दोनों मामलों में तटरक्षक बल ने तेजी से राहत और बचाव कार्य किया और समुद्री पर्यावरण को नुकसान से बचाने की कोशिश की। हाल ही में आईसीजीएस 'अटल' (तेज गश्ती पोत) और 'समुद्र प्रचेत' (पॉल्यूशन कंट्रोल वेसल) जैसे स्वदेशी जहाज लॉन्च किए गए हैं, जो भारतीय जलक्षेत्र में सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को और मजबूत करेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर शिवमणि ने कहा कि तटरक्षक बल के पास तट के किनारे कई स्टेशन और मुख्यालय हैं, जो जहाजों को ईंधन, राशन और अन्य जरूरी सामग्री तुरंत उपलब्ध कराते हैं, ताकि वे जल्दी से फिर गश्त पर लौट सकें। उन्होंने यह भी बताया कि 'डिजिटल कोस्ट गार्ड प्रोजेक्ट' से बल की डिजिटल क्षमता और नेटवर्किंग को बढ़ाया जाएगा, ताकि भारतीय महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य से निपटा जा सके।