भारतीय तटरक्षक बल ने एक बार फिर मसीहा बनकर एक श्रीलंकाई मछुआरे की जान बचाई है। बल ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने यहां से लगभग 100 नॉटिकल मील दूर एक नाव पर गंभीर हृदय रोग से पीड़ित एक श्रीलंका के नागरिक को बचाया। युवक को इलाज के लिए तुरंत हवाई मार्ग से शहर ले जाया गया।
आईसीजी के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) को पहले एमआरसीसी कोलंबो से श्रीलंकाई मत्स्य पालन पोत (एसएलएफवी) 'कल्पेनी' के बारे में एक संकट चेतावनी मिली। उन्होंने बताया कि नौका के इंजन में खराबी के कारण समुद्र तट से हटकर बहने लगी थी।
एमआरसीसी कोलंबो ने सूचित किया कि नाव 22 मार्च को छह चालक दल के सदस्यों के साथ श्रीलंका में 'कॉडबे' मछली पकड़ने के बंदरगाह से रवाना हुई थी।
एक रक्षा विज्ञप्ति के अनुसार नाव से 28 मार्च से सभी संचार बंद हो गया था। एमआरसीसी कोलंबो ने सूचित किया कि हवा के बहाव के कारण नाव के भारतीय जल क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना है।
कैसे हुआ रेस्क्यू
रक्षा विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि आईसीजी जहाज ने मंगलवार को पुडुचेरी बंदरगाह से लगभग 40 समुद्री मील दूर देखा था। आईसीजी का एक तकनीकी दल श्रीलंकाई नाव पर चढ़ गया और इंजन की मरम्मत करने का प्रयास किया। हालांकि, पुर्जों की कमी ने प्रयास में बाधा उत्पन्न की।
सूचना के मुताबिक तटरक्षक बल ने नाव पर भोजन और पानी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की। श्रीलंकाई अधिकारियों को जहाज की स्थिति के बारे में सूचित किया गया और उनसे इसे बेस पोर्ट पर वापस ले जाने के लिए एक टो की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया।
दिल की बीमारी से जूझ रहा था शख्स
आगे बताया गया कि भारतीय तटरक्षक बल द्वारा चालक दल के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की गई। इसके बाद शुक्रवार को जानकारी मिली कि सदस्यों में से एक 44 वर्षीय युवक को सांस लेने में तकलीफ हो गई थी और दिल की बीमारी होने का संदेह था।
इस समय तक नाव चेन्नई से लगभग 60 समुद्री मील दूर तक बह चुकी थी। भारतीय तटरक्षक बल ने तुरंत अपना जहाज आईसीजीएस रानी अबक्का नाव की ओर भेजा और कुछ ही घंटों में मरीज को निकाल लिया गया।