भारतीय काली चाय की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर पश्चिम एशिया के देशों में। संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ ईरान और इराक भी भारतीय चाय के प्रमुख आयातकों में शामिल हो रहे हैं। असम, दार्जिलिंग और नीलगिरि की चाय अपनी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बना रही है।
भारतीय काली चाय की पश्चिमी एशिया में धूम मची हुई है। संयुक्त अरब अमीरात तो काली चाय का सबसे बड़ा आयातक है। अब ईरान, इराक भी में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह भारतीय काली चाय की उत्कृष्ट गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण और विविध वैश्विक पहचान इसकी सफलता के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। भारत वैश्विक चाय उद्योग में दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक है।
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भारत की असम, दार्जिलिंग और नीलगिरि चाय दुनिया के बेहतरीन चाय में शुमार हैं। कुल चाय निर्यात में काली चाय का हिस्सा 96 प्रतिशत है। जबकि ग्रीन, हर्बल, मसाला और लेमन टी जैसी किस्में भारत से निर्यात की जाती हैं। संयुक्त अरब अमीरात, इराक, अमेरिका और ईरान शीर्ष गंतव्यों के रूप में उभरे हैं। यूएसए व जर्मनी में भारतीय चाय निर्यात होती है।
तेजी से बाजार बढ़ रहा बाजार
रूस को निर्यात घटकर 60.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, फिर भी मूल्य और मात्रा दोनों के आधार पर रूस भारत के सबसे बड़े चाय बाज़ारों में से एक बना रहा। तुर्की को 26.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर, कनाडा को 9.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर, श्रीलंका को 8.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कीमत की चाय निर्यात की गई।
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चीन से लेकर ईरान तक बढ़ी काली चाय की मांग
भारतीय चाय की आमद चीन में भी खूब बढ़ रही है। केवल दो साल में इसका चीन को होने वाला निर्यात दुगना हो गया। पिछले वित्त वर्ष में 18.1 हजार टन हो गई काली चाय चीन भेजी गई। ईरान में भी इसकी मांग बढ़ रही है। इस देश को निर्यात बढ़कर 51.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। वहीं, यूके को 44.0 मिलियन अमेरिकी डॉलर और जर्मनी 35.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की चाय निर्यात की गई। इसके अलावा पूरे यूरोप में इसकी मांग बढ़ रही है।
पश्चिम बंगाल और असम कुल निर्यात का 71% से अधिक योगदान
पश्चिम बंगाल और असम ने मिलकर कुल निर्यात का 71% से अधिक योगदान दिया। तमिलनाडु व केरल की हिस्सेदारी एक चौथाई रही। पश्चिम बंगाल 302.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर आँर असम सं 232.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की चाय बाहर भेजी गई। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का भी निर्यात में योगदान रहा।