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दूसरे ग्रहों पर कैसे रहेंगे लोग?: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने दिखाई झलक, लोगों से की ये खास अपील

Wed, 02 Sep 2026 10:47 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपनी ताजा पोस्ट में दूसरे ग्रहों पर इंसानों को रहने का कॉन्सेप्ट साझा किया है। साथ ही उन्होंने देश के युवाओं और वैज्ञानिकों से खास अपील भी की। आइए जानते हैं कि शुभांशु शुक्ला ने क्या-क्या कहा... 
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शुभांशु शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट में शुभांशु शुक्ला ने इंसानों के पृथ्वी के बाहर दूसरे ग्रहों पर रहने की परिकल्पना साझा की है और साथ ही आईआईएससी बंगलूरू की लैब द्वारा बनाए गए उन आवासों की वीडियो भी साझा की है, जिनकी मदद से दूसरे ग्रहों पर रहा जा सकता है। 
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शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर लिखा पोस्ट
शुभांशु शुक्ला ने पोस्ट में लिखा, 'B.H.E.E.M — भारतीय रहने योग्य, पृथ्वी के बाहर का आवास (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat)। जब हम रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटे, तो हमने अपनी एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग में लॉन्च व्हीकल और ऑर्बिटल मॉड्यूल के सिस्टम को समझना, साथ ही जबरदस्त फिजिकल और स्पेसफ्लाइट ट्रेनिंग लेना शामिल था। लेकिन हमारी ट्रेनिंग का एक और, बिल्कुल अलग पहलू भी था—एकेडमिक रिसर्च।'

शुभांशु ने आगे लिखा, 'हमें भविष्य के स्पेस एक्सप्लोरेशन से जुड़ा कोई विषय चुनने, उसकी गहरी समझ बनाने और उसमें कुछ ऐसा योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया जो भारत के भविष्य के स्पेस प्रोग्राम के लिए उपयोगी हो सके। ऐसे में मैंने उस स्पेसक्राफ्ट से आगे की सोचने का फैसला किया, जिसे उड़ाने की हम ट्रेनिंग ले रहे थे। और मैंने इस बारे में सोचा कि लैंडिंग के बाद इंसान कहां रह सकते हैं। मेरे रिसर्च का विषय पृथ्वी के बाहर रहने की जगहें थीं। यह ऐसी तकनीक और कॉन्सेप्ट है, जो इंसानों को पृथ्वी के बाहर रहने और काम करने में मदद कर सकें।'
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आईआईएससी, बंगलूरू के कॉन्सेप्ट को किया साझा
आईआईएससी बंगलूरू की अलोके लैब ने B.H.E.E.M का कॉन्सेप्ट पेश किया है। जिसमें उन आवासों का डिजाइन पेश किया गया है, जिनमें भविष्य में दूसरे ग्रहों पर लोग रह सकते हैं। शुभांशु शुक्ला ने आईआईएससी बंगलूरू के इस वीडियो को साझा किया है और लिखा कि मैं जो सोच रहा था, उसका नतीजा है आईआईएससी बंगलूरू का ये B.H.E.E.M है। शुक्ला ने कहा, 'दूसरे ग्रहों पर रहने के लिए इंसानों को पहले कई बड़ी चुनौतियों को हल करना होगा, जिसमें रेडिएशन, बहुत ज्यादा तापमान और लाइफ सपोर्ट , ऊर्जा, निर्माण और हम कहां रहेंगे? आदि सवालों को पहले हल करना होगा।' 
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भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि आज से 20 साल बाद इंसान पृथ्वी के बाहर रहें, तो इसका काम 20 साल बाद शुरू नहीं हो सकता। बल्कि हमें आज ही इस पर काम शुरू करना होगा। उन्होंने लिखा, 'किसी दूसरी दुनिया में रहने की जगह बनाने की दिशा में पहला कदम शायद उसकी पहली ईंट रखना न हो। बल्कि बस यह कल्पना करने की हिम्मत हो सकती है कि वह रहने की जगह कैसी दिख सकती है।'
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