भारतीय सेना ने राजस्थान के थार मरुस्थल में 'एयर कैवलरी' कॉन्सेप्ट का परीक्षण करते हुए रविवार को युद्धाभ्यास किया। यह कॉन्सेप्ट भारतीय सेना की शक्ति को कई गुना तक बढ़ा देगा। इसकी सहायता से भारत अब अपने शत्रु देशों से आसानी से निपट पाएगा। इस कॉन्सेप्ट की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है अमेरिका ने भी वियतनाम युद्ध के समय इस कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल किया था। जिसमें उसने दुश्मन की जमीनी सेना के ठिकानों का पता कर उन पर हमला किया था।
बता दें एयर कैवलरी कॉन्सेप्ट के तहत टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ लड़ाकू हेलिकॉप्टर पूरे समन्वय के साथ काम करते हैं। ताकि दुश्मनों पर चौतरफा हमले किए जा सकें। इससे देश की युद्ध में जीतने की संभावनाएं कई गुना तक बढ़ जाती हैं। इस पर रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष ओझा ने बताया कि 'हाल ही में महाजन फायरिंग रेंज में हुए युद्धाभ्यास alt147 विजय प्रहार के दौरान दक्षिण पश्चिम कमान ने एयर कैवलरी परीक्षण किया। इस कॉन्सेप्ट को विस्तृत बातचीत के बाद लागू किया गया है।'
भारतीय सेना के लिए ये कॉन्सेप्ट नया है और इसकी सहायता से अब सैनिक दुश्मनों पर दोहरी आक्रामकता से हमला कर पाएंगे। सेना ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास किया है। इसका मकसद लड़ाकू हेलिकॉप्टरों को हासिल कर अपनी युद्ध क्षमता को मजबूत करना है। सामान्य युद्ध की परिस्थियों में जब जमीन पर सेना बल किसी वजह से दुश्मनों पर काबू नहीं कर पाता है तब सेना द्वारा युद्धक हेलिकॉप्टरों को जरूरत के आधार पर बुलाया जाता है।