चीन को अपनी सेना एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर ले जाने की कई अपील करने और कई सप्ताह तक इंतजार करने के बाद भारतीय सेना ने उसे उसी की चाल से एक और मात दे दी है। गलवां घाटी में हिंसक झड़प के बाद यह दूसरी बार है जब पिछले दो महीने के दौरान चीनी सैनिकों को मुंह की खानी पड़ी है। भारतीय सेना ने स्पांगुर गैप और स्पांगुर झील के पास सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण चोटियों पर 29-30 अगस्त को अपने विशेष दस्ते तैनात कर दिए हैं। इसके पास से चीन की बनाई एक सड़क गुजरती है और इस सड़क से उसके टैंक, सैन्य वाहन भारतीय क्षेत्र की तरफ आ सकते थे। अब यहां भारतीय पहरा है।
सेना मुख्यालय का कहना है कि 29-30 अगस्त को इस क्षेत्र में चीन की फौज के आने की सूचना मिली। भारतीय सैनिकों ने चीन की इस घुसपैठ को नाकाम कर दिया और वहां तिरंगा फहरा दिया। तब से इस क्षेत्र पर भारतीय कब्जे को लेकर चीन की नाक-भौं दोनों सिकुड़ी है। गीदड़ भभकी के अंदाज में पड़ोसी देश ने स्पांगुर झील और स्पांगुर गैप के अलावा कई क्षेत्रों में टैंकों, तोपों, एंटी टैंक मिसाइलों की युद्ध के हालात जैसी तैनाती कर दी है।
अभी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीडीएस जनरल रावत और तीनों सेनाओं के जनरलों से ताजा हालात की जानकारी ली है। रक्षा मंत्री, सीडीएस, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी उच्चस्तरीय बैठक की है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ताजा हालात से अवगत कराया गया है। ऐसा समझा जा रहा है कि बैठक के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम, रणनीतिक तैयारी, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को लेकर भी चर्चा हुई है। सेना से अपने मानदंडों के भीतर उच्चस्तरीय सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
स्पांगुर गैप, स्पांगुर लेक दोनों भारतीय क्षेत्र की हवाई पट्टी चुशुल के करीब हैं। यहां से एलएसी सटी हुई है। चीन के कब्जे वाला क्षेत्र साफ दिखाई देता है। इस क्षेत्र से चीन की बनाई गई सड़क को बख्तरबंद वाहन, सैन्य वाहन को क्षेत्र में लाने के लिए तैयार किया था। इस तरह से भारतीय सेना ने अपने रणनीतिक कौशल, बहादुरी तथा साहस से दूसरी बार चीनी सैनिकों को नीचा दिखाया है। हालांकि यहां भारतीय क्षेत्र ने किसी बहुत बड़े क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया है, लेकिन पैंगोंग के दक्षिणी किनारे पर स्थिति यह क्षेत्र चीन की आंख में शीशे के तिनके की तरह गड़ रहा है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी बड़े दिन बाद सार्वजनिक तौर पर भारतीय भाषा बोलते नजर आए। उन्होंने माना कि भारत-चीन के बीच में स्पष्ट सीमा का निर्धारण न होने के कारण इस तरह के हालात पैदा होते हैं। पहले चीन की घुसपैठ के बाद अपने लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए भारत इस तरह की भाषा का अधिक प्रयोग करता था। दिलचस्प है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दोनों देशों से मतभेद का समाधान बातचीत से करने,मुद्दों को सहीं मंच पर उठाने, संघर्ष की स्थिति से बचने की अपील की है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत बताई है। हालांकि वांग यी ने घुसपैठ के लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आंख में धूल झोंकने वाली सफाई देते हुए कहा है कि चीन एलएसी का सम्मान करता है और उसके सैनिकों ने एलएसी को पार नहीं किया है।
सितंबर के दूसरे सप्ताह तक दोनों देशों के बीच में लद्दाख में चीनी घुसपैठ की समस्या का समाधान निकल आने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को में शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। चीन और रूस समेत 15 देशों के रक्षा मंत्री वहां होंगे। इसके बाद दस सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर भी विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे। समझा जा रहा है कि इस दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से चर्चा होगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और स्टेट काउंसलर तथा विदेश मंत्री वांग यी के बीच में भी टोलीफोन पर वार्ता के पूरे आसार हैं। इसको लेकर दुनिया के देशों की निगाहें टिकी हैं।
इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वांग यी के बीच में वार्ता के बाद पांच जुलाई को सहमति बनी थी। दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के स्तर की यह पहली वार्ता थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी वांग यी से फोन पर बात की थी। दोनों देशों के बीच में लद्दाख क्षेत्र में चीन की घुसपैठ को लेकर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास भी जारी हैं।