केन्द्र सरकार के सकारात्मक रूख ने रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को पंख लगा दिए हैं। पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने विदेश से आयात न होने (प्रतिबंधित) वाले रक्षा साजो-सामान की एक सूची प्रकाशित की थी। इसमें तोप भी शामिल थी। डीआरडीओ के वैज्ञानिक बताते हैं कि इस नीतिगत निर्णय का ही नतीजा रहा है कि डीआरडीओ द्वारा विकसित तोप की तकनीक सफलता के मानदंड बनाने जा रही है। सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार एडवांस टोड ऑर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) ने विंटर ट्रायल के दौरान सभी पैरामीटर पर सफलता के झंडे गाड़े हैं।
विंटर ट्रायल के क्रम में 155 एमएम, 52 कैलिबर की एटीएजी को सिक्किम में नाथुला के पास प्वाइंट (17 माइल्स) पर दिसंबर में ले जाया गया था। मोबिलिटी ट्रायल पूरा हो चुका है और वैज्ञानिकों का कहना है कि तोप ने सभी मानकों को आसानी से पूरा किया है। अब राजस्थान के पोखरण क्षेत्र में इसका समर ट्रायल होना है। समझा जा रहा है कि मई-जून में इसे भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सेना और डीआरडीओ तोप की गुणवत्ता, क्षमता, घातकता आदि के बारे में अपनी रिपोर्ट देगी।
ये ट्रायल तो अभी तक विदेशी तोपों के भी नहीं हुए
सूत्र बताते हैं कि मोबिलिटी ट्रायल आज तक दिन में ही हुए हैं। सेना ने सभी विदेशी तोपों का परीक्षण दिन में ही किया है। रात के परीक्षण थोड़ा कठिन होते हैं। लेकिन डीआरडीओ की तोप इस पैमाने पर खरी उतरी है। पीएसक्यूआर ट्रायल भी रात और दिन दोनों समय किए गए। अभी तक भारतीय सेना विदेशी तोपों का यह परीक्षण भी दिन में ही करती आई है।
इसी तरह से बैटरी बैकअप के टेस्ट भी रात में और सुबह तड़के किए गए। डीआरडीओ सूत्रों का कहना है कि यह दुनिया की पहली तोप है, जिससे सातवें जोन तक फायर किया जा सकता है। यह रात और दिन दोनों समय में युद्ध करने में सक्षम हैं और इसकी फायरिंग की क्षमता तथा उसकी शुद्धता दुनिया की किसी भी टोड आर्टिलरी गन के मुकाबले अच्छी है।
डिफेंस एक्सपो-2020 में डीआरडीओ ने उठाया था पर्दा
डीआरडीओ ने 2020 में लखनऊ में आयोजित डेफ एक्सपो में एटीएजीएस को प्रदर्शित किया था। पिछले साल ही इस तोप के परीक्षण की अनुमति मिल गई थी। अब विंटर ट्रायल के पूरा होने के बाद इसका राजस्थान के पोखरण रेंज में समर ट्रायल होगा और इसके बाद अंतिम परीक्षण के नतीजे के आधार पर इसे सेना के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।