भारतीय सेना की पूर्वी कमान के अधीन स्पीयर कोर ने पूर्वी अरुणाचल प्रदेश की कठिन परिस्थितियों वाले अग्रिम इलाकों में ‘एक्सरसाइज ड्रोन कवच’ का सफल आयोजन किया। इस दौरान विभिन्न सामरिक अभ्यासों और युद्ध परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए सेना की तैयारी को परखा गया।
भारतीय सेना की पूर्वी कमान के अधीन स्पीयर कोर ने पूर्वी अरुणाचल प्रदेश की कठिन परिस्थितियों वाले अग्रिम इलाकों में ‘एक्सरसाइज ड्रोन कवच’ का सफल आयोजन किया। अभ्यास का मकसद ड्रोन युद्ध की अगली पीढ़ी के लिए भारतीय सेना की तैयारियों को को प्रदर्शित करना था। इस अभ्यास ने भारतीय सेना को अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स परखने का मौका दिया।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुवाहाटी में बताया कि चार दिनों तक चले इस युद्धाभ्यास में अग्रिम मोर्चों पर तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने भी भाग लिया। इस दौरान विभिन्न सामरिक अभ्यासों और युद्ध परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए सेना की तैयारी को परखा गया। अभ्यास में लक्ष्य पहचान, सक्रिय और निष्क्रिय काउंटर-ड्रोन उपायों व निशाना साधकर उन्हें निष्क्रिय करने की रणनीतियों को सिमुलेटेड परिस्थितियों में आजमाया गया। साथ ही, यूनिट स्तर पर नई व्यवस्थाओं के जरिए भी तरीक़े और प्रक्रियाएं विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि सैन्य कामकाज और ज्यादा असरदार ढंग से किया जा सके।
इस अभ्यास से मिले अनुभव भारतीय सेना को भविष्य के बहु-क्षेत्रीय और तकनीक-प्रधान युद्धक्षेत्र की गहरी समझ विकसित करने और ड्रोन युद्ध में निर्णायक बढ़त हासिल करने में मददगार होंगे। ‘एक्सरसाइज ड्रोन कवच’ भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और तकनीक आत्मसात करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उसे परिचालन उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।