सेना के कोर कमांडर्स ने शुक्रवार को मणिपुर में सुरक्षा हालात का जायजा लिया। सैन्य अधिकारियों ने तांगखुल–कुकी झड़पों से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया। साथ ही सेना द्वारा स्वदेशी ड्रोन असेंबली, मरम्मत और ड्रोन युद्धक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की गई।
मणिपुर में हालिया हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय सेना ने राज्य में अपनी तैयारियों और तैनाती का व्यापक आकलन किया। स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने राज्य के अग्रिम और संवेदनशील इलाकों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था तथा सैन्य तैयारियों की समीक्षा की। सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने रेड शील्ड डिवीजन के अंतर्गत आने वाले कांगवाई, सेंद्र, लितान और
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वाईकेपीआई क्षेत्रों का दौरा किया।
कोर कमांडर ने किया हवाई सर्वेक्षण
इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में तैनात जवानों और अधिकारियों से बातचीत कर मौजूदा सुरक्षा हालात की जानकारी ली। कोर कमांडर ने हाल में हुई तांगखुल–कुकी झड़पों से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने जमीन पर तैनात सैनिकों की सतर्कता, पेशेवर क्षमता और कठिन परिस्थितियों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की सराहना की। सेना के अनुसार, उन्होंने जवानों से कहा कि क्षेत्र में शांति कायम रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर स्तर पर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने लेइमाखोंग सैन्य स्टेशन स्थित रेड शील्ड ड्रोन लैब का भी निरीक्षण किया। यहां सेना द्वारा स्वदेशी ड्रोन असेंबली, मरम्मत और ड्रोन युद्धक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की गई।
परिचालन क्षमता बेहतर करने की प्रतिबद्धता
अधिकारियों ने उन्हें मिशन आधारित ड्रोन तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के बारे में जानकारी दी। कोर कमांडर ने ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सैनिकों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और तकनीकी दक्षता की प्रशंसा करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में आधुनिक तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। भारतीय सेना ने कहा कि यह दौरा क्षेत्र में परिचालन क्षमता को और मजबूत करने, तकनीकी संसाधनों को बढ़ाने तथा मणिपुर में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।