रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से हो रहे पहले अंतरिक्ष रक्षा अभ्यास का सोमवार को सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने शुभारंभ किया था। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया था।
भारत की तीनों सेनाओं ने बुधवार को रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से आयोजित पहले अंतरिक्ष अभ्यास में भाग लिया। इस दौरान तीनों सेनाओं के अधिकारियों ने भावी युद्ध क्षेत्र की स्थितियों की जानकारी ली। 11 नवंबर से शुरू हुए तीन दिवसीय अभ्यास कार्यक्रम के दौरान अफसरों को तमाम जानकारियों से परिचित कराया गया।
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अफसरों ने कहा कि अंतरिक्ष युद्ध के क्षेत्र में भारतीय सशस्त्र बलों की रणनीतिक तत्परता को बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभ्यास महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह प्रशिक्षण भारत की अंतरिक्ष आधारित परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने, अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए तीनों सेनाओं के एकीकरण को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तीन दिवसीय अंतरिक्ष अभ्यास कार्यक्रम का सोमवार को सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने शुभारंभ किया था। इस दौरान उन्होंने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत को अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं का पूरा फायदा उठाने के लिए नए-नए विचरों और प्रक्रियाएं विकसित करने पर ध्यान देना होगा।
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बुधवार को अभ्यास का समापन किया गया। इस दौरान रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के अफसरों ने बताया कि अभ्यास के दौरान अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों, अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इसमें महत्वपूर्ण संपत्तियों की निगरानी और सुरक्षा के साथ ही तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष वातावरण में स्थिति जागरूकता बनाए रखने के महत्व पर भी बात हुई। अभ्यास में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सैन्य, वैज्ञानिक और शैक्षणिक क्षेत्र के अलावा भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के विषय विशेषज्ञों के प्रयासों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं और तकनीकों के वर्तमान और भविष्य के परिदृश्य में बहुमूल्य जानकारी दी। इस दौरान रक्षा अंतरिक्ष संचालन में आने वाली चुनौतियों और अंतरिक्ष सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानूनों के बारे में बताया। अफसरों ने कहा कि अंतरिक्ष अभ्यास 2024 से तीनों सेनाओं और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के बीच अंतर-संचालन क्षमता में सुधार, आपसी समझ और सामंजस्य को बढ़ावा मिला।