साहस, संकल्प और रोमांच की नई कहानी लिखते हुए भारतीय सेना की गजराज कोर ने सोमवार को अपने ऐतिहासिक 'माउंट कांगटो अभियान' की औपचारिक शुरुआत की। यह अभियान न केवल पर्वतारोहण का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सैनिकों की अडिग इच्छाशक्ति, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल भी है। इस मौके पर गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह ने अग्रिम बेस से इस अभियान को हरी झंडी दिखाई।
सेना की ओर से बताया गया कि इस मिशन में 18 साहसी पर्वतारोहियों की एक टीम हिस्सा ले रही है। यह टीम पूर्वी हिमालय की सबसे कठिन चोटियों में से एक माउंट कांगटो (7,042 मीटर / 23,103 फीट) को फतह करने निकली है। इस अभियान की खास बात यह है कि इस चोटी पर 1930 के बाद से कोई सफल आरोहण नहीं हुआ। अब करीब 95 साल बाद भारतीय सैनिक इस चुनौती को स्वीकार कर फिर से इस ऊंचाई को छूने जा रहे हैं।
कठोर परिस्थितियों से जूझना होगा
सेना के मुताबिक, इस टीम को अपने अभियान के दौरान बर्फीली ढलानों, ग्लेशियरों, तेज हवाओं और ऑक्सीजन की कमी जैसी कठोर परिस्थितियों से जूझना होगा। यह केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि सैनिकों की मानसिक और शारीरिक क्षमता की परीक्षा भी है। माउंट कांगटो के इलाके को दुनिया के सबसे दुर्गम और कम खोजे गए पर्वतीय क्षेत्रों में गिना जाता है।
अभियान को दिया गया ये नारा
गजराज कोर ने इस अभियान के लिए नारा दिया है। “जोश इन द हार्ट्स, समिटिंग माउंट कांगटो!” यह नारा भारतीय सेना के जज्बे, वीरता और अनुशासन का प्रतीक है। सेना का कहना है कि यह मिशन सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और टीमवर्क की भावना को ऊंचा उठाने का प्रयास है। इस मिशन के जरिए सैनिकों का उद्देश्य है कि देश की युवा पीढ़ी में भी रोमांच और सेवा भावना को प्रेरित किया जा सके।
गजराज कोर इसलिए प्रसिद्ध
भारतीय सेना ने बताया कि यह मिशन उनके उन अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा है जो सैनिकों के शारीरिक और मानसिक कौशल को और अधिक सशक्त बनाते हैं। गजराज कोर हमेशा से कठिन अभियानों के लिए प्रसिद्ध रही है और इस बार भी उसने अपने सैनिकों के साहस और समर्पण का परिचय दिया है। सेना ने कहा कि माउंट कांगटो अभियान भारत की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक बनेगा।