भारत और चीन के तनातनी के बीच अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भारतीय सेना के जवानों ने एलएसी के पास दुर्गम क्षेत्रों में बुधवार को योगाभ्यास किया। भारत के लिए सबसे प्रतिष्ठित बुमला दर्रे पर भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भाग लिया और जवानों के साथ योग किया। बुमला दर्रे पर भारतीय सेना ने योगाभ्यास करके चीन को एक बड़ा मैसेज दिया है। इसमें हजारों जवानों ने हिस्सा लिया। वास्तव में ऊंचे पाहाड़ियों में तैनात भारतीय सेना के जवान योगाभ्यास से ही खुद को हर दम किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रखते हैं। कहते भी हैं, योग - 'विषम परिस्थितियों में सैनिक के लिए वरदान' है। नौवें योग दिवस के अवसर पर सेना ने स्थानीय लोगों के साथ योगाभ्यास किया।
सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि गजराज कोर के सैनिकों ने अपनी परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के लिए योग को एक नियमित उपाय के रूप में अपनाया है। गजराज कॉर्प्स ज़ोन में अत्यधिक दुर्गम इलाके और मौसम की स्थिति को झेलने वाले सैनिकों ने योग का उपयोग करके अपने को मजबूत करने और अपनी युद्ध की तैयारी को कई गुना बढ़ाने के लिए खुद के लिए अवसर बना लिया है। बुधवार को 9वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस गजराज जोन में भारतीय सेना के जवानों और स्थानीय लोगों ने उत्साह और जोश योग दिवस मनाया।
तेजपुर, रूपा, टेंगा, मिसामारी, तवांग, रंगिया जैसे सभी सैन्य स्टेशनों और सीमा के साथ सभी अग्रिम चौकियों पर केंद्रीय रूप से आयोजित कार्यक्रमों के अलावा प्रतिष्ठित बुमला दर्रे पर भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भाग लिया और जवािनों के साथ योगाभ्यास किया।
भारत के हिसाब से बड़ा महत्वपूर्ण दर्रा है बुमला
बुमला दर्रा बारत के तवांग शहर से 37 किलोमीटर और चीन शासित तिब्बत के त्सोना जोन्ग शहर से करीब 43 किलोमीटर दूर है। यह करीब 15,300 फीट ऊंचाई पर है। यह स्थान सामरिक हिसाब से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। एक बहुत पुरानी सड़क तवांग से मिलाकाटोंग ला पास होते हुए बुमला दर्रा होते हुए अंत में तिब्बत के सोना जोंग तक जाता है। वर्ष 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला कर दिया था, तब इस मार्ग का अपना ही ऐतिहासिक महत्व रहा है।