माकूल वक्त और जगह तय करते हुए भारतीय सेना ने पहली बार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में घुसकर उड़ी आतंकी हमले का बदला ले लिया। सेना के विशेष दस्ते ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) से तीन से पांच किलोमीटर आगे बढ़ते हुए पीओके के सात आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल हमले कर घुसपैठ को तैयार बैठे 38 आतंकियों को मार गिराया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री और सेना ने वादा किया था कि उड़ी के 18 जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी और जवाबी कार्रवाई के लिए वक्त और जगह हम तय करेंगे। बुधवार-बृहस्पतिवार की दरम्यानी रात को सेना के जांबाज नौ पैराकमांडो की पांच क्रैक टीम ने पीओके में घुसकर तकरीबन चार घंटे तक ऑपरेशन चलाया जिसमें आतंकियों का बचाव करने आए पाकिस्तानी सेना के दो जवान भी मारे गए।
पीओके के भिंबर, तत्तापानी, केल, और लीपा स्थित आतंकी शिविरों पर सर्जिकल कार्रवाई की गई। कार्रवाई को रात 12.30 बजे से सुबह 4.30 बजे तक अंजाम देने के बाद जांबाज पैराकमांडोज सुरक्षित लौट आए। गैर-आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सेना के विशेष दस्ते ने इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों के साथ ही पाक सेना के 9 जवानों को भी मार गिराया।
पीएम मोदी ने किया था सबक सिखाने का वादा
पीएम मोदी
- फोटो : ANI
सर्जिकल ऑपरेशन को वॉर रूम में रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, सेना प्रमुख और डीजीएमओ ने मॉनिटर किया। डीजीएमओ ने प्रेस कांफ्रेंस में सर्जिकल कार्रवाई की पुष्टि की। सूत्रों ने बताया कि एलओसी पर आतंकियों के इन ठिकानों पर पिछले एक सप्ताह से सेना नजर रख रही थी।
केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि ये हमले कुपवाड़ा और पुंछ के पास एलओसी के अंदर 5-6 ठिकानों पर किए गए। इस अचानक कार्रवाई की घोषणा सैन्य अभियानों के महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टि. जनरल रणबीर सिंह ने की। हमले की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता करने के ठीक बाद की गई।
संवाददाता सम्मेलन में जनरल सिंह ने कहा, ‘हमें कल बेहद विश्वसनीय और खास सूचना मिली थी कि कुछ आतंकी समूह घुसपैठ के लिए एलओसी के पास लांच पैड पर तैयार बैठे हैं। ये सभी जम्मू कश्मीर तथा देश के कुछ महानगरों में आतंकी हमले की फिराक में थे। इन्हीं लांच पैड पर भारतीय सेना ने कल रात धावा बोला और आतंकियों को मार गिराया।’
सीमा से सटे गांव खाली कराए गए
संवाददाता सम्मेलन में उनके साथ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप भी थे। सेना ने बताया कि कार्रवाई में सभी जवान सुरक्षित लौटे हैं। हालांकि दो भारतीय जवान घायल हुए हैं लेकिन उनका इस ऑपरेशन से कोई लेना-देना नहीं था। एक जवान लैंडमाइन पर पैर पड़ने के कारण जबकि दूसरा गोली लगने से घायल हुआ।
उड़ी आतंकी हमले पर भारत की जवाबी कार्रवाई के बीच दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ गई है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारत ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। इस क्रम में पश्चिमी सीमा में हाई अलर्ट घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा लगते राज्यों-गुजरात, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान को सरहद के निकटवर्ती गांवों को तत्काल खाली कराने का निर्देश दिया गया है।
खुद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है। वाघा बॉर्डर पर रोज शाम में होने वाली रिट्रीट समारोह को रद्द कर दिया गया है। सरहद पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती करने के अलावा सैनिकों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
जानिए कैसे चला सेना का ऑपरेशन?
सर्जिकल कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसकी सूचना दी। इसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुला कर सभी दलों को सेना के इस ऑपरेशन की जानकारी दी।
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में डीजीएमओ ने सर्जिकल कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने सेना की कार्रवाई के बारे में अपने पाकिस्तानी समकक्ष को भी जानकारी दे दी है।
ऐसे चला सेना का ऑपरेशन
-सेना ने बुधवार की रात 12.30 बजे कार्रवाई शुरू की और यह बृहस्पतिवार सुबह 4.30 तक चली।
-एलओसी के 2 से 3 किमी दायरे में मौजूद आतंकियों के सात ठिकानों को निशाना बनाया गया।
-घुसपैठ के लिए तैयार इन आतंकियों पर पिछले एक सप्ताह से डीजीएमओ की नजर थी।
-प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में की गई सर्जिकल हमले की तैयारी।
-नौ पैराकमांडो की पांच क्रैक टीम ने कार्रवाई को सफल बनाया।
-यह ऑपरेशन हेलिकॉप्टर सेना और थलसेना की संयुक्त कार्रवाई में चलाया गया।
-पीओके के भिंबर, तत्तापानी, केल, लीपा सेक्टरों में चली सैन्य कार्रवाई।
-ऊधमपुर के उत्तरी कमान से पैराकमांडो ने हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी और इन ठिकानों पर उतर कर मोर्चा संभाला।
-सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों और उन्हें समर्थन करने वाले पाक सैनिकों को ढेर किया गया।
-इसके बाद सुबह 4.30 बजे सुरक्षित अपने ठिकाने पर लौट आए।