सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'यंग लीडर्स ट्रेनिंग विंग में जाने वाला हर जवान कमीशन अधिकारी नहीं बन जाएगा, लेकिन उनमें से कई बनेंगे। इकाई सत्र पर बेहतर पेशेवर प्रतिद्वंद्विता के साथ ये जवान बाकी के लिए रोल मॉडल बन सकते हैं।'
अधिकारियों के तौर पर जवानों का चयन तीन तरीकों से किया जाता है। इसमें से एक आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) है, दूसरा विशेष कमीशन अधिकारी (एससीओ एंट्री) द्वारा और तीसरा परमानेंट कमीशन (विशेष सूची) या पीसीएसएल द्वारा है। पहले दो तरीकों से आए अधिकारियों के किसी भी ब्रांच में तैनात किया जा सकता है वहीं पीसीएसएल अधिकारियों की तैनाती विशेष रूप से नामित नियुक्तियों पर होती है।
यंग लीडर्स ट्रेनिंग विंग में चयन की प्रक्रिया बहुचरणात्मक है। सबसे पहले इसमें पंटमढ़ी स्थिस आर्मी एजुकेशन कॉर्प्स सेंटर पर एक लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें 500 सफल जवान चयनित किए जाएंगे। इनमें कठिन स्क्रीन प्रोसेस के बाद 100 जवान चयनित किए जाएंगे। किसी भी आकस्मित परिस्थिति के लिए 10 फीसद जवान रिजर्व श्रेणी में रखे जाएंगे।