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वीडियो: 18600 फीट पर पायलटों का साहस, नुन-कुन की पहाड़ी पर सेना के हेलीकॉप्टर ने एक स्किड टिकाकर मरीज को बचाया

Sun, 30 Aug 2026 11:38 AM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली

सार

भारतीय सेना के पायलटों ने नुन-कुन के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू किया। तेज हवाओं और खड़ी ढलान के बीच हेलिकॉप्टर का एक स्किड टिकाकर मरीज को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया गया। आखिर कैसे हुआ यह जोखिम भरा ऑपरेशन? आइए, जानते हैं...
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भारतीय सेना का साहसिक रेस्क्यू - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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भारतीय सेना के एविएशन पायलटों ने शनिवार को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में 18,600 फीट की ऊंचाई पर सफल मेडिकल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। नुन-कुन पर्वत श्रृंखला के पास तेज हवाओं और खड़ी पहाड़ी ढलान के बीच एक घायल व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह अभियान उस समय किया गया, जब ऊंचाई वाले इलाके में दिन की आखिरी रोशनी तेजी से खत्म हो रही थी। ऐसे में पायलटों के पास ऑपरेशन पूरा करने के लिए बेहद कम समय था।

18,600 फीट पर हेलिकॉप्टर उड़ाना क्यों था चुनौतीपूर्ण?

इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व काफी कम हो जाता है। इससे हेलिकॉप्टर के इंजन के प्रदर्शन और रोटर से मिलने वाली लिफ्ट पर असर पड़ता है। चुनौती को देखते हुए विमान से गैर-जरूरी सामान हटाकर उसका वजन कम किया गया। हेलिकॉप्टर में केवल जरूरी ईंधन रखा गया, ताकि वजन कम रहने से ऊंचाई पर उड़ान और रेस्क्यू की क्षमता बेहतर बनी रहे। इसके बावजूद मरीज को सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त दूरी तय करने लायक ईंधन रखा गया।

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खड़ी ढलान पर कैसे हुआ रेस्क्यू?

मरीज तक पहुंचने के बाद पायलटों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हेलिकॉप्टर को उतारने के लिए जगह न होना थी। घटनास्थल पर तेज पहाड़ी हवाएं चल रही थीं और ढलान काफी खड़ी थी। ऐसे हालात में पायलटों ने हेलिकॉप्टर को बेहद कम ऊंचाई पर स्थिर रखा। इसके बाद एक बेहद जोखिम भरी तकनीकी प्रक्रिया के तहत हेलिकॉप्टर का सिर्फ एक स्किड ढलान से टिकाया गया। इसी स्थिति में मरीज को तेजी से हेलिकॉप्टर के अंदर सुरक्षित किया गया। मरीज को सुरक्षित लेने के बाद हेलिकॉप्टर ने वहां से उड़ान भरी और सफलतापूर्वक नीचे पहुंचा।

सेना ने बताया साहस और तकनीकी दक्षता का उदाहरण

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अभियान की जानकारी साझा की। सेना ने बताया कि नुन-कुन के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर बिना लैंडिंग स्पेस और तेज हवाओं के बीच यह निकासी की गई। सेना के मुताबिक, आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो का इस्तेमाल करते हुए पायलटों ने असाधारण सटीकता और साहस के साथ ऑपरेशन पूरा किया। अभियान में हेलिकॉप्टर को हल्का करने के लिए गैर-जरूरी उपकरण हटाए गए और सीमित ईंधन के साथ उड़ान भरी गई। यह रेस्क्यू अभियान भारतीय सेना एविएशन की ऑपरेशनल तैयारी, तकनीकी क्षमता और कठिन पर्वतीय इलाकों में लोगों की जान बचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्या होता है वन स्किड लैंडिंग

हेलिकॉप्टर के नीचे लगी दो लंबी पट्टीनुमा संरचनाओं को स्किड कहा जाता है। जब हेलिकॉप्टर को समतल जमीन नहीं मिलती, तब पायलट सामान्य तरीके से हेलिकॉप्टर नहीं उतार सकता। ऐसी स्थिति में वह सिर्फ एक स्किड को जमीन या ढलान पर टिकाकर हेलिकॉप्टर को संतुलित रखते हैं। इसे वन-स्किड लैंडिंग कहा जाता है।

उड़ान से पहले भारी सामान को हटाया

18,600 फीट की ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होने के कारण हेलिकॉप्टर के इंजन की क्षमता और रोटर से मिलने वाली उठान शक्ति कम हो जाती है। ऐसे हालात में ज्यादा वजन के साथ उड़ान भरना मुश्किल होता है। अभियान को सफल बनाने के लिए हेलिकॉप्टर से सभी गैर-जरूरी सामान और उपकरण हटा दिए गए।

  • हेलिकॉप्टर में केवल उतना ही ईंधन रखा गया, जितना मरीज को निकालने के लिए जरूरी दूरी तय करने और सुरक्षित लौटने के लिए आवश्यक था।
  • वजन कम करने का मकसद हेलिकॉप्टर की उठान क्षमता बढ़ाना था, ताकि वह इतनी ऊंचाई पर भी जरूरी नियंत्रण बनाए रख सके।
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