सुखोई 'अपग्रेड प्रोजेक्ट' के तहत इनमें एक शक्तिशाली रडार सिस्टम लगाया जाएगा, जोकि 'एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे' की तरह सक्षम होगा। इसके साथ ही इनमें नए एवियॉविक्स शामिल किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि हथियारों के नियंत्रण और नई मिसाइलों के इंटिग्रेशन के लिए नए कंप्यूटर सिस्टम की जरूरत होगी।
दो सीट वाले 42 सुखोई विमानों को भी सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों से अपग्रेड किया जाएगा। मालूम हो कि सुखोई विमान तीन हजार किलोमीटर दूर तक हमला कर सकता है। वहीं, इसकी क्रूज रेंज 3200 किलोमीटर तक है, जबकि कॉम्बेट रेडियस 1500 किलोमीटर है।
भारतीय वायुसेना के 49 मिराज-2000एस को भी अपग्रेड किए जाने की योजना है। इनमें से ही कुछ विमानों का उपयोग 26 फरवरी को हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान किया गया था। इनके अपग्रेडेशन में 17,547 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इससे पहले साल 2015 में भी मिराज-2000एस को अपग्रेड करके वायुसेना को सौंपा गया था। उस वक्त उनमें नए इलेक्ट्रॉनिक और रडार सिस्टम लगाया गया था। चूंकि इसमें दो इंजन होते हैं इसलिए इसके क्रैश होने की संभावना बहुत ही कम है। भारतीय वायुसेना के लिए ये आधुनिक लड़ाकू विमान महत्वपूर्ण साबित होंगे।