खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के बाद पाक सीमा पर एयर डिफेंस यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया गया है। भारतीय सेना का आंतरिक मूल्यांकन भी किया है। इनकी तैनाती जम्मू—कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान होगी। यह सिस्टम दुश्मन के हवाई हमले नाकाम करने के साथ थल सेना के जवानों को सुरक्षा चक्र प्रदान करेगा। इसमें कई तरह की मिसाइलें तैनात होंगी। जानकार कहते हैं कि पाकिस्तानी सीमा पर एयर डिफेंस यूनिट के अलावा कई सैन्य टुकड़ियां तैनात की जाएंगी।
भारत में बनी "आकाश अल्ट39 मिसाइल की होगी तैनाती
सीमा और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए रूस का क्वादार्ट सिस्टम और भारत निर्मित आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम तैनात किया जाएगा। इनके अलावा एमआर-एसएएम डिफेंस सिस्टम, जो कि डीआरडीओ और इजरायल मिलकर बना रहे हैं, उसे भी तैनात किया जाएगा।
एयर डिफेंस सिस्टम सिर्फ वायुसेना तक सीमित नहीं रहते, क्योंकि किसी भी जगह से हमला हो सकता है। इसलिए उनमें वायु, जल और थल सेना का पूरा साथ रहता है। ये दो तरह से देश की रक्षा करते हैं पहला खतरे का पता लगाना और दूसरा नुकसान पहुंचाने से रोकना। खतरे का पता लगाना यानी थ्रेट डिटेक्शन के लिए रडार और एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम इस्तेमाल होता है। नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए उस खतरे को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल होता है।
मध्यम रेंज का मिसाइल सिस्टम आकाश एसएएम
ये मध्यम रेंज सरफेस एयर मिसाइस सिस्टम है, जो थल और वायु सेना दोनों के पास है। इससे निकलने वाली मिसाइल की अधिकतम स्पीड 2.5 मैक (साउंड स्पीड) है दो 0.5 से 18 किलोमीटर ऊंचाई तक हमला कर सकती है। जो दुश्मनों के ड्रोन, हेलिकॉप्टर, फाइटर और मिसाइल भी आसानी से नष्ट कर सकती है। इसकी मिसाइल को राजेंद्र रडार अल्ट39 गाइडेंस देता है।
ये रडार 60-80 किलोमीटर तक के एरिया में एक्टिव रहता है। इसे इलेक्ट्रिक काउंटर हमले से खराब नहीं किया जा सकता। आकाश सिस्टम का वायुसेना संस्करण और थल सेना संस्करण दोनों अलग हैं। इससे एक साथ कई हमले नाकाम हो सकते हैं।
एसए-6 : ये सिस्टम एसएएम यानी सरफेस टू एअर मिसाइल पर आधारित है। ये सोवियत यूनियन का पुराना लो टू मीडियम लेवल एयर डिफेंस सिस्टम है। लेकिन अभी भी कई जगह इस्तेमाल हो रहा है। ये 24 किलोमीटर तक निशाना साध सकता है और 14 किलोमीटर की ऊंचाई तक मारक है।
एसए-3: ये भी सोवियत संघ के समय का डिफेंस सिस्टम है, जो इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, इसे हटाकर सभी जगह आकाश सिस्टम लगाए जाने हैं। ये 100 मीटर से लेकर 18 किलोमीटर तक की ऊंचाई तक मारक है। न्यूनतम रेंज 3.5 और अधिकतम रेंज 35 किमी।
एसए-5 या ए-200: ये मीडियम टू हाई लेवल मिसाइल सिस्टम है। इसे बहुत ऊंचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट के लिए लगाया गया है। इसकी रेंज 150 किलोमीटर से 300 किलोमीटर के बीच है और स्पीड 8 मैक है। इसका रडार सिस्टम काफी मजबूत है, ये लॉन्ग रेंज बम से बचाने में अहम रोल निभाता है।
एसए-8 अल्ट39गेको मोड-1अल्ट39
इसे कहीं भी ले जाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी रेंज छोटी है और ये भी सोवियत संघ के समय का है। इसमें मिसाइल एक गाड़ी के ऊपर लगी होती है और इसका अपना रडार है। इसे बाकी रडार के साथ या उसके अलावा इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी रेंज 15 किलोमीटर है और 12 किलोमीटर ऊंचाई मारक क्षमता है।
एसए-19 "ग्रिसन" या 2के22 "तुंगुस्का"
ये चर्चित एयर डिफेंस मोड है। इसमें 0.2 से लेकर 4 किलोमीटर की रेंज के 10 किलोमीटर तक मारने की क्षमता है। इसकी बंदूकें 1 मिनट में 4000 से 5000 राउंड फायर करती हैं और भारतीय सेना के पास इसके करीब 20-90 यूनिट सेवा में हैं।
पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम/प्रद्युम्न: यह एयर डिफेंस सिर्फ एयरक्राफ्ट के लिए नहीं है बल्कि बैलिस्टिक मिसाइल के हमले से बचने के लिए भी इस्तेमाल होता है। ये टू-स्टेज मिसाइल सिस्टम है जो 80 किलोमीटर तक हमला कर सकता है। ये मैक 5 स्पीड से 300 से 2000 किलोमीटर रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने में सक्षम है।